
Dhar news: रक्षाबंधन सिर्फ कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के उस रिश्ते का उत्सव है, जिसमें सुख-दुख में साथ निभाने और जरूरत पडऩे पर एक-दूसरे के लिए खड़े होने का संकल्प छिपा है। धार के वडनेरकर परिवार की वनिता वडनेरकर ने इसी रिश्ते की गहराई को अपने त्याग से साबित किया है। उन्होंने अपने छोटे भाई संजय वडनेरकर को अपनी किडनी देकर नया जीवन दिया। आज दोनों स्वस्थ हैं और इस रक्षाबंधन पर उनके रिश्ते की डोर पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है। साल 2025 में 55 वर्षीय शिक्षाविद् संजय गंभीर किडनी बीमारी की चपेट में आए। धीरे-धीरे स्थिति ऐसी हुई कि उनका जीवन डायलिसिस पर निर्भर हो गया।
परिवार ने पुणे में उपचार कराया, जहां चिकित्सकों ने किडनी ट्रांसप्लांट को ही बेहतर विकल्प बताया। बीमारी का समाधान सामने था, लेकिन सवाल था कि किडनी कौन देगा। इसी चिंता के बीच बड़ी बहन वनिता ने बिना देर किए कहा- चिंता मत कर, मैं दूंगी किडनी। 67 वर्षीय वनिता के इस निर्णय ने पूरे परिवार को भावुक कर दिया। उम्र को देखते हुए चिकित्सकों ने उनके स्वास्थ्य की जांच की। योग और प्राणायाम के कारण वह स्वयं को स्वस्थ रखती थीं। जांच में वह किडनी दान करने के लिए पूरी तरह उपयुक्त पाई गईं। वर्ष 2026 में सफल प्रत्यारोपण के बाद संजय को नया जीवन मिला।
संजय की बीमारी की खबर के बाद परिवार के अन्य सदस्यों ने भी साथ खड़े होने में देर नहीं की। बड़े भाई के बेटे रोहन और बड़ी बहन के बेटे राहुल ने भी किडनी देने की इच्छा जताई। लेकिन वनिता ने दोनों की कम उम्र और उनके भविष्य को देखते हुए उन्हें मना कर दिया। उन्होंने स्वयं भाई के लिए यह जिम्मेदारी उठाई। अविवाहित वनिता आज भी अपने छोटे भाई के स्वास्थ्य को लेकर उतनी ही सजग हैं।
वनिता का यह त्याग बताता है कि परिवार केवल रिश्तों का नाम नहीं, बल्कि जरूरत के समय एक-दूसरे की ढाल बनने का नाम है। इस रक्षाबंधन पर वनिता की राखी सिर्फ संजय की कलाई पर नहीं सजेगी, बल्कि उनकी दी हुई किडनी के रूप में भाई की हर सांस में उनके स्नेह की डोर बंधी रहेगी।