
Navratri 2026: शक्ति पर्व नवरात्र इस बार 11 अक्टूबर से शुरु हो रहा है। शरद ऋतु का यह त्योहार पूरे 9 दिनों का होगा लेकिन तिथियों में व्यापक भ्रम फैला है। शारदीय नवरात्रि में सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथियों पर असमंजस की स्थिति है। अधिकांश पंचांगों के अनुसार सप्तमी और नवमी तिथियां दो दिन पड़ रही है। सप्तमी की पूजा दो दिन होगी। शारदीय नवरात्रि पर तिथियों के इस गणित ने भक्तों को उलझा दिया है। हालांकि धर्माचार्यों और ज्योतिषाचार्यों ने शास्त्रोक्त विधि से इस परेशानी को सुलझाया भी है। शारदीय नवरात्रि में अंग्रेजी कैलेंडर की किस तारीख को कौन सी तिथि होगी, इसे स्पष्ट किया है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि नवरात्रि में सभी 9 दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है। दुर्गा पूजन में प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना का महत्व बताया गया है जिसके साथ ही मां की पूजा अर्चना का सिलसिला शुरु हो जाता है।
इस बार सप्तमी तिथि लगातार दो दिन आ रही है। सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर को सुबह 4.32 बजे से आरंभ हो जाएगी। 18 अक्टूबर को सुबह 8.29 मिनट बजे तक सप्तमी तिथि रहेगी। दोनों दिन सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि व्याप्त रहेगी। ऐसे मेें उदया तिथि के नियम के अनुसार 17 और 18 अक्टूबर, दोनों दिन सप्तमी की पूजा की जाएगी।
शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन यानि सप्तमी की ही तरह अष्टमी और नवमी तिथियों पर भी असंमजस है। सबसे खास बात यह है कि इस बार अष्टमी और नवमी पूजन एक ही दिन किया जाना है। दरअसल पंचांग की गणना के अनुसार, ये दोनों तिथियां एक ही दिन यानी 19 अक्टूबर, सोमवार को पड़ रही हैं। अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर की सुबह 8:27 बजे से शुरू हो जाएगी जोकि 19 अक्टूबर की सुबह 10:51 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। नवमी 20 अक्टूबर को दोपहर में 12.51 बजे तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि प्रारंभ होगी।
उदया तिथि के आधार पर 19 अक्टूबर को ही अष्टमी पूजन किया जाएगा। महागौरी की पूजा कर इसी दिन कन्या पूजन और भोज सहित सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे। इसी दिन नवमी भी मनाई जाएगी।
इधर 20 अक्टूबर को दशमी तिथि पर दशहरा मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, इस पर्व के संबंध में भी स्पष्ट विधान है। दशमी तिथि जिस दिन शाम के समय होती है, उसी दिन दशहरा मनाने की बात कही गई है।