धर्म-कर्म

क्या आपके हाथ में भी इस जगह है यह रेखा, तुरंत देखें..

क्या आपके हाथ में भी इस जगह है यह रेखा, तुरंत देखें..
2 min read
Mar 05, 2020
क्या आपके हाथ में भी इस जगह है यह रेखा, तुरंत देखें..
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर किसी व्यक्ति के हाथ में यह रेखा बनी हो तो समझे उनके भाग्य का शीघ्र उदय होने वाला है। हाथ में इस रेखा वाले जातकों के जीवन से धन संबंधित सभी समस्याएं दूर होगी। हाथ में बनी इस रेखा को देखने के लिए किसी ज्योतिष पंडित के पास जाने की जरूरत नहीं इसे कोई स्वयं भी देख सकता है। जानें कौन से रेखा से आपके भाग्य का उदय हो सकता है।

1- किसी के हाथ की हृदय रेखा पर त्रिशूल बनता हो, उंगलियां चाहे टेढ़ी-मेढ़ी हो तो ऐसे लोंगो के ईष्ट देव भगवान शिव माने जाते है और उन्हें जीवन में आने वाले कष्टों से मुक्ति के लिए शिव की आराधना करना चाहिए, एवं इस मंत्र- ऊँ नमः शिवाय का जप 108 बार करना चाहिए।

2- जिनकी हृदय रेखा के अंत पर एक शाखा गुरु पर्वत पर जाती हो तो उन्हें तुरंत राम भक्त श्री हनुमान जी का पूजन करना चाहिए। साथ ही इस मंत्र- "ऊँ नमो हनुमंता" का 108 बार जप करें, एवं हनुमान चालीसा का पाठ करें।

3- यदि भाग्य रेखा खंडित हो व इसमें दोष हो तो ऐसे लोगों को लक्ष्मी माता का ध्यान या लक्ष्मी मंत्र का जप करना चाहिए। माता लक्ष्मी को ईष्ट मानकर इस मंत्र- "ऊँ श्रीं, ह्रीं, श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं सिद्ध लक्ष्म्यै नमः" का जप करना चाहिए।

4- यदि हाथ में सूर्य ग्रह दबा हुआ हो, व्यक्ति को शिक्षा में पूर्ण सफलता न मिल पा रही हो, मस्तिष्क रेखा खराब हो, तो सूर्य को ईष्ट मानकर इस सूर्य मंत्र- "ऊँ ह्रां, ह्रीं, ह्रौं सः सूर्याय नमः" जप करें।

5- अगर जीवन रेखा व भाग्य रेखा को कई मोटी रेखाएं काट रही हो तो ऐसे लोगों के प्रत्येक कार्य, व्यवसाय आदि में रुकावटें आता है। इससे मुक्ति के लिए इस मंत्र- "ऊँ श्रीं, ह्रीं, श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं सिद्ध लक्ष्म्यै नमः" का जप करना चाहिए।

6- यदि हृदय रेखा व मस्तिष्क रेखा एक हो या मस्तिष्क रेखा मंगल क्षेत्र तक जाती हो तो इन्हें भगवान कृष्ण की पूजा एवं इस मंत्र- "ऊँ नमोः भगवते वासुदेवाय नमः का जप 108 बार करना चाहिए।

7- किसी के हाथ में शनि की अंगुली सीधी हो, शनि ग्रह मध्य हो तो ऐसे व्यक्तियों को शनि देव की स्तुति के साथ इस शनि मंत्र का जप नियमित रूप से करें। मंत्र- "ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सह शनिश्चराय नम:"

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Updated on:
05 Mar 2020 10:12 am
Published on:
05 Mar 2020 10:12 am