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17 से 19 सितंबर तक तीन बड़े पर्व, संतान सप्तमी से राधाष्टमी और महालक्ष्मी उत्सव पर बन रहा शुभ संयोग

Santan Saptami 2026: 17 सितंबर से तीन दिन तक भक्ति का खास रंग दिखेगा। संतान सप्तमी, महालक्ष्मी और राधाष्टमी पर शुभ योग, विशेष पूजा और अनोखी परंपराएं आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
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भारत

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Akash Dewani

Sep 16, 2026

17 september santan saptami radhashtami mahalakshmi utsav

Santan Saptami 2026: 17 से 19 सितंबर तक तीन बड़े पर्व (फोटो सोर्स- Chatgpt)

Radha Ashtami 2026: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तिथियों के संयोग में 17 सितंबर से भक्ति का त्रिदिवसीय उत्सव शुरू होने जा रहा है। 17 सितंबर को सर्वार्थ सिद्धि योग में संतान की दीर्घायु और खुशहाली के लिए संतान सप्तमी का व्रत रखा जाएगा, जिसके साथ ही मोरियाई छठ और सूर्य षष्ठी का पर्व भी मनाया जाएगा। इसी दिन अनुराधा नक्षत्र में शाम 07:54 बजे तक मराठीभाषी परिवारों में भगवती पराम्बा महालक्ष्मी (ज्येष्ठा गौरी) की स्थापना होगी।

सूर्यदेव और बाल गोपाल का होगा पूजन

संतान सप्तमी (Santan Saptami 2026) को ललिता सप्तमी भी कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य सौरभ दुबे के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल सप्तमी तिथि 17 सितंबर को सुबह 10:03 बजे से शुरू होकर 18 सितंबर को पूर्वान्ह 11:51 बजे तक रहेगी। उदद्यातिथि के मान से 17 सितंबर को ही व्रत रखना सर्वश्रेष्ठ होगा। पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 10:11 बजे से दोपहर 03:46 बजे तक रहेगा। इस दिन माताएं भगवान शिव, माता पार्वती, सूर्यदेव और लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना कर संतान की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करेंगी। मान्यता है कि निःसंतान महिलाओं द्वारा सच्चे मन से यह व्रत करने पर गुणवान संतान की प्राप्ति होती है। पूजन में आटे या बेसन के लड्डुओं का विशेष भोग लगाया जाता है।

पर्वकाल समापन

वहीं, 18 सितंबर को श्रीकृष्णप्रिया राधारानी का प्राकट्‌योत्सव राधाष्टमी धूमधाम से मनाया जाएगा और 19 सितंबर को मूल नक्षत्र में महालक्ष्मी विसर्जन के साथ इस पावन पर्वकाल का समापन होगा।

मराठी परिवारों में ज्येष्ठा गौरी आगमन

17 सितंबर को ही मराठीभाषी परिवारों में महालक्ष्मी का अपने पुत्र-पुत्री के साथ आगमन होगा। ढाई दिनों के इस उत्सव के प्रथम दिन मां को ज्वार की रोटी और आमडी की भाजी का भोग लगाया जाएगा। दूसरे दिन 18 सितंबर को ज्येष्ठा नक्षत्र में मुख्य पूजन और महानैवेद्य होगा, जिसमें 16 प्रकार की रोटी, सब्जी, चटनी, मिठाई और अचार मुरब्बे का भोग अर्पित किया जाएगा। साथ ही 16-16 पत्तों की जोड़ी, निशिगंधा व कमल के फूलों की माला और 16 आटे के दीपक जलाए जाएंगे। 19 सितंबर को मूल नक्षत्र में मां को भावभीनी विदाई दी जाएगी।

18 सितंबर को राधाष्टमी के अवसर पर शहर के प्रमुख राधा-कृष्ण मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होगी। मंदिरों में महाअभिषेक, अलौकिक श्रृंगार, भजन और अखंड संकीर्तन के आयोजन किए जाएंगे। जगह-जगह भंडारे और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन से पूरा शहर राधारानी की भक्ति के रंग में सराबोर नजर आएगा। मंदिरों में महाअभिषेक, अलौकिक श्रृंगार, भजन और अखंड संकीर्तन के आयोजन किए जाएंगे। जगह-जगह भंडारे और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन से पूरा शहर राधारानी की भक्ति के रंग में सराबोर नजर आएगा।