
Ganesh Chaturthi 2026 Tithi: इस वर्ष गणेशोत्सव का पर्व शहर में बेहद खास और लमबे समय तक यानी पूरे 12 दिन का रहने वाला है। पंचांग की तिथियों में घट-बढ़ और क्षय होने के कारण गजानन का यह जन्मोत्सव 10 दिन के बजाय 12 दिन तक मनाया जाएगा। हर साल यह पर्व 10 दिन का होता है, लेकिन इस बार तिथियों के अद्भुत संयोग ने इसकी अवधि को दो दिन और बढ़ा दिया है।
पहले दिन तीज-चतुर्थी और दूसरे दिन चतुर्थ युक्त ऋषि पंचमी का संयोग रहा। इसके बाद पंचमी-षष्ठी और षष्ठी युक्त सप्तमी का क्रम आया।
इस बार सप्तमी तिथि दूसरे दिन दोपहर 12:05 बजे तक रहने के बाद अष्टमी तिथि लग जाएगी। अष्टमी युक्त सप्तमी होने के कारण व्रत के लिए मान्य न होने की स्थिति में 17 तारीख को संतान सप्तमी मनाई जाएगी।
पांचवें दिन सप्तमी युक्त अष्टमी रहेगी, जिससे एक माह तक चलने वाले महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत होगी। छठवें दिन अष्टमी-नवमी का संयोग रहेगा, जिस दिन राधाष्टमी और दूर्वा अष्टमी मनाई जाएगी।
सातवें दिन नवमी दशमी और आठवें दिन दशमी युक्त एकादशी का संयोग है। हालांकि इस दिन एकादशी मान्य नहीं होगी, बल्कि दसवें दिन एकादशी युक्त द्वादशी पर व्रत पूजन किया जा सकेगा। इसी दिन पद्मा एकादशी और वामन पद्मा एकादशी, श्रवण एकादशी और भगवान वामन का अवतार दिवस मनाया जाएगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सत्येन्द्र स्वरूप शास्त्री के अनुसार इस बार गणेशोत्सव की शुरुआत तीजा के साथ चतुर्थी से हुई है। पर्व के दौरान कई प्रमुख तिथियों का ऐसा मेल बना है, जिससे धार्मिक अनुष्ठानों की रूपरेखा भी बदल गई है।
उत्सव के अंतिम चरणों में, दसवें दिन द्वादशी युक्त त्रयोदशी के साथ पंचक की शुरुआत हो जाएगी। ग्यारहवें दिन पूरे दिन त्रयोदशी मान्य रहेगी, जिस पर प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इसके बाद बारहवें दिन चतुर्दशी तिथि पूरे दिन मान्य होगी। इसी पावन दिन अनंत चतुर्दशी का व्रत-पूजन किया जाएगा और शहरभर में बाजे-गाजे के साथ गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन होगा। तिथियों के इस फेर ने इस बार के गणेशोत्सव को श्रद्धालुओं के लिए और अधिक उत्साहवर्धक और आध्यात्मिक रूप से खास बना दिया है।
Updated on:
15 Sept 2026 10:18 am
Published on:
15 Sept 2026 10:18 am
