धर्म-कर्म

मनचाहा जीवनसाथी पाने की आस्था, नवरात्रि के 6वें दिन मां कात्यायनी की पूजा विधि और मंत्र

Maa Katyayani puja vidhi mantra: शारदीय नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है। मान्यता है कि उनकी आराधना से विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं और मनचाहा जीवनसाथी मिलता है।
2 min read
• •
Oct 15, 2026
maa katyayani puja vidhi mantra marriage blessings
Maa Katyayani puja vidhi mantra: नवरात्रि के 6वें दिन मां कात्यायनी की पूजा विधि और मंत्र (फोटो सोर्स- Patrika)

Maa Katyayani puja vidhi mantra: शारदीय नवरात्रि के छठवा दिन मां कात्यायनी की पूजा का होता है। माता कात्यायनी को योद्धा देवी माना जाता है। मां कात्यायनी का नाम ऋषि कात्या के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने उनका पालन-पोषण किया था। माता को सिंह पर सवार दिखाया गया है। उनके दोनों हाथों में वर एवं अभय मुद्राएं है। श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध के अध्याय 2 के अनुसार, श्रीकृष्ण की पत्नी माता रुक्मिणी और ब्रज की गोपियों ने आदर्श जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए देवी कात्यायनी का व्रत किया था। तब से यह मान्यता है कि अविवाहित युवतियां यदि मां कात्यायनी का व्रत करती हैं तो उन्हें भी श्रीकृष्ण की तरह पति मिल सकता है।

ऐसे करें मां कात्यायनी की पूजा

  • स्नान कर स्वच्छ और लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
  • माँ कात्यायनी की प्रतिमा या चित्र को चौकी पर स्थापित करें-माता का ध्यान करें और उन्हें अपने घर में विराजमान होने का निमंत्रण दें।
  • चावल, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें।
  • माता को लाल फूल और सिंदूर अर्पित करें।
  • इसके बाद माता को शहद का भोग लगाएं।
  • दीप जलाकर श्रद्धा से आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

पूजा का विशेष महत्व

  • विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
  • योग्य वर की प्राप्ति मान्यता।
  • कुंडली के मंगल दोष का निवारण होता है।
  • इनकी कृपा से वैवाहिक जीवन और प्रेम संबंधों में मधुरता आती है

मां कात्यायनी का महत्व

मां कात्यायनी का जन्म महर्षि कात्यायन के तप से हुआ था, इसलिए इन्हें कात्यायनी कहा जाता है। इनका स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और युद्ध के लिए तत्पर रहता है।यह आज्ञा चक्र को जागृत करने वाली देवी हैं।

मां दुर्गा ने क्यों लिया था कात्यायनी का रूप?

किवदंती है कि, ऋषि कात्यायन देवी दुर्गा को अपनी पुत्री के रूप में जन्म देने की कामना करते थे जिसके लिए कठोर तपस्या की यह वहीं समय था जब राक्षस महिषासुर का पृथ्वी पर प्रकोप बढ़ता जा रहा था।महिषासुर का विनाश करने के लिए देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता की प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने भगवान शिव और भगवान ब्रह्मा को अपने साथ आने का आह्वान किया। त्रिमूर्ति ने अपनी शक्तियों का संयोजन करके देवी कात्यायनी को जन्म दिया, जो ऋषि कात्यायन की पुत्री थीं। कालिका पुराण में कहा गया है कि ऋषि कात्यायन ने सबसे पहले कात्यायनी के रूप में पूजा की थी।

इस मंत्र का करें जाप

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः

चन्द्रहासोज्ज्वलकर शार्दुलवरवाहन

कात्यायनी शुभं दद्यद् देवि दानवघातिनी

या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

Updated on:
15 Oct 2026 03:22 pm
Published on:
15 Oct 2026 03:22 pm