
Maa Katyayani puja vidhi mantra: शारदीय नवरात्रि के छठवा दिन मां कात्यायनी की पूजा का होता है। माता कात्यायनी को योद्धा देवी माना जाता है। मां कात्यायनी का नाम ऋषि कात्या के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने उनका पालन-पोषण किया था। माता को सिंह पर सवार दिखाया गया है। उनके दोनों हाथों में वर एवं अभय मुद्राएं है। श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध के अध्याय 2 के अनुसार, श्रीकृष्ण की पत्नी माता रुक्मिणी और ब्रज की गोपियों ने आदर्श जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए देवी कात्यायनी का व्रत किया था। तब से यह मान्यता है कि अविवाहित युवतियां यदि मां कात्यायनी का व्रत करती हैं तो उन्हें भी श्रीकृष्ण की तरह पति मिल सकता है।
मां कात्यायनी का जन्म महर्षि कात्यायन के तप से हुआ था, इसलिए इन्हें कात्यायनी कहा जाता है। इनका स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और युद्ध के लिए तत्पर रहता है।यह आज्ञा चक्र को जागृत करने वाली देवी हैं।
किवदंती है कि, ऋषि कात्यायन देवी दुर्गा को अपनी पुत्री के रूप में जन्म देने की कामना करते थे जिसके लिए कठोर तपस्या की यह वहीं समय था जब राक्षस महिषासुर का पृथ्वी पर प्रकोप बढ़ता जा रहा था।महिषासुर का विनाश करने के लिए देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता की प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने भगवान शिव और भगवान ब्रह्मा को अपने साथ आने का आह्वान किया। त्रिमूर्ति ने अपनी शक्तियों का संयोजन करके देवी कात्यायनी को जन्म दिया, जो ऋषि कात्यायन की पुत्री थीं। कालिका पुराण में कहा गया है कि ऋषि कात्यायन ने सबसे पहले कात्यायनी के रूप में पूजा की थी।
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः
चन्द्रहासोज्ज्वलकर शार्दुलवरवाहन
कात्यायनी शुभं दद्यद् देवि दानवघातिनी
या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः