
Shiv-Parvati Crocodile Story: सावन माह में भगवान शिव की आराधना करने के साथ कथा (Sawan Katha 2026) सुनने का भी महत्व है। शिव पुराण में भगवान शिव से जुड़े कई प्रसंग वर्णित हैं। इसमें भगवान शिव के अवतारों और वरदान से जुड़ी कथाएं भी वर्णित हैं। एक प्रसंग ऐसा भी है जिसमें भगवान शिव ने मगरमच्छ का रूप में माता पार्वती की परीक्षा ली थी।
माता पार्वती भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठिन तप कर रही थीं। उनके तप को देखकर देवी-देवताओं ने भगवान शिव से माता पार्वती की मनोकामना पूर्ण करने का आग्रह किया। भगवान शिव ने माता पार्वती की परीक्षा लेने के लिए सप्तर्षियों को भेजा। सप्तर्षियों ने माता पार्वती को भगवान शिव के कई अवगुण गिनाएं लेकिन उन्हें भोलेनाथ के अलावा और से विवाह मंजूर नहीं था।
विवाह से पूर्व भगवान शिव अपनी भावी पत्नी को लेकर आश्वस्त होना चाहते थे। इसलिए उन्होंने माता पार्वती की स्वयं परीक्षा लेने की सोची। भगवान शिव प्रकट हुए और माता पार्वती को वरदान देकर अंतर्ध्यान हो गए। इतने में जहां माता तप कर रही थीं, वहीं पास में मगरमच्छ ने एक लड़के को पकड़ लिया। लड़का जान बचाने के लिए चिल्ला रहा था। माता पार्वती लड़के की चीख नहीं सुन सकी और उसकी मदद के लिए तालाब के पास पहुंचीं। माता पार्वती ने देखा कि एक मगरमच्छ लड़के को अंदर की ओर ले जा रहा है। लड़के ने माता पार्वती से कहा कि माता मेरी आप रक्षा करें। मेरी ना तो मां हैं और ना ही पिता। ना ही कोई मित्र। पार्वती जी ने मगरमच्छ से लड़के को छोड़ने के लिए कहा।
मगरमच्छ बोला-दिन के छठे पहर में जो मिलता है, उसे अपना आहार समझ कर खाना मेरा नियम है। पार्वती जी ने कहा- इसे छोड़ दो, बदले में मुझसे जो चाहिए वह बता दो। मगरमच्छ बोला- मैं एक ही शर्त पर छोड़ सकता हूं। आपने अपने तप से भगवान शिव से जो वरदान प्राप्त किया, अगर उसका फल आप मुझे दे दें, तो मैं इसे छोड़ दूंगा। माता पार्वती अपने तप का फल देने के लिए राजी हो गई। मगरमच्छ ने समझाया कि देवी सोच लीजिए। आपने हजारों वर्षों तक जैसा तप किया है वह देवी-देवताओं के लिए संभव नहीं है। पार्वती जी ने कहा कि उनका फैसला अडिग है।
मगरमच्छ ने पार्वती माता से तपदान का संकल्प करवाया। तप का दान होते ही मगरमच्छ का शरीर चमकने लगा। मगर माता पार्वती से बोला- देवी आपके तप के प्रभाव से मैं तेजस्वी बन गया हूं। आपने अपने जीवन भर की पूंजी बच्चे के लिए व्यर्थ कर दी। आप चाहें मैं आपको एक और मौका दे सकता हूं। माता पार्वती कहती हैं- मैं तप फिर से कर सकती हूं लेकिन तुम इस लड़के को निगल जाते, तो इसका जीवन वापस कैसे मिल पाता ? देखते ही देखते मगरमच्छ और लड़का दोनों ही विलुप्त हो गए।
माता पार्वती के मन में विचार आया कि तप का फल दान कर दिया था। अब पुनः तप प्रारंभकरना चाहिए। पार्वती जी ने तप प्रारंभ करने के लिए संकल्प लिया। भगवान शिव प्रकट हुए और बोले- पार्वती, अब क्यों तप कर रही हो? पार्वती जी ने भगवान शिव से कहा- मैंने अपने तप का फल दान कर दिया है। आपको पति के रूप में पाने के लिए वैसा ही घोर तप करूंगी और आपको प्रसन्न करूंगी। भोलेनाथ बोले-मगरमच्छ और लड़के के रूप में मैं ही था। मैंने परीक्षा लेने के लिए यह पूरी लीला रची थी। तुमने अपने तप का दान मुझे ही दिया है. इसलिए पुनः तप करने की आवश्यकता नहीं है। माता पार्वती ने भगवान शिव को प्रणाम करते हुए प्रसन्न मन से विदा किया।