
Ancestors Pictures In Puja Room : सनातन धर्म में पूर्वजों यानि पितरों का बड़ा महत्व है। माना जाता है हमारे जीवन के सभी सुख उनके आशीर्वाद से प्राप्त होते हैं। सभी धर्मग्रंथों में पितरों की महत्ता प्रतिपादित की गई है। यहां तक कि उनके लिए सालभर में एक पक्ष ही समर्पित किया गया है। पितर पक्ष में घर के पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध तर्पण करने के साथ ही दान दक्षिणा देने का विधान है। लोग अपने घरों का नाम भी मां पिता के नाम पर रखते हैं। कई घरों में पूजा स्थल पर पूर्वजों या पितरों की तस्वीरें भी लगाते हैं। धर्माचार्य और ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि पितरों का हमारे जीवन में अहम स्थान है। उनकी तस्वीरें लगाने के लिए शास्त्रोक्त विधान भी हैं।
घर के पूजा स्थल पर भगवान की तस्वीर उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में लगानी चाहिए
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि घर के पूजा स्थल पर भगवान की तस्वीर हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा में लगानी चाहिए। पारंपरिक वास्तु ग्रंथों में भी इसका उल्लेख है। घर का पूजा स्थल ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में होना चाहिए। भगवान की तस्वीरें इस प्रकार लगाना चाहिए कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर रहे। पूजा करते समय भक्त का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहना चाहिए।
गृह पारिजातम (Griha Parijatam), मयमतम् (Mayamatam) और विश्वकर्म प्रकाश (Vishwakarma Prakash) जैसे विख्यात वास्तु ग्रंथों में भगवान की तस्वीर रखने के अनेक नियम बताए गए हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार भगवान की दो तस्वीरों को कभी भी एक-दूसरे के आमने-सामने नहीं रखना चाहिए। तस्वीरों को कभी भी फर्श या जमीन पर न रखें। खंडित, टूटी-फूटी या धुंधली तस्वीरें लगाना वर्जित किया गया है।
पूजा घर में पितरों की तस्वीरें लगाने की वास्तु शास्त्र में मनाही की गई है। धर्मग्रंथों में भी यही कहा गया है। वास्तुशास्त्री पंडित अरुण बुचके के अनुसार अपने पूर्वजों (पितरों) की तस्वीरें कभी भी घर के पूजा स्थल पर नहीं रखनी चाहिए। सनातन धर्म में पितरों को दक्षिण दिशा में स्थान दिया गया है। अतएव घर के दक्षिण में उनकी तस्वीरें लगाई जा सकती हैं। पितरों की तस्वीरों को दीवार पर उचित ऊंचाई पर लगाना चाहिए ताकि वह आपकी छाती या नजर के स्तर के बराबर हो।