
Tulsi in Sawan Puja: सावन का महीना सिर्फ व्रत और पूजा-पाठ का नहीं, बल्कि एक गहरे आध्यात्मिक अनुभव का समय होता है। श्रावण को भारतीय संस्कृति और श्रद्धा का प्रतीक महीना माना गया है। हिंदू धर्म में एक पवित्र समय है जो भगवान शिव की दिव्य शक्ति से ओतप्रोत है। इस दौरान शिव साधना करने वालों की हर मनोकामना पूरी होती है। इस पवित्र महीने में महादेव की पूजा-अर्चना का विधान है। हर साल सावन आते ही शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। शिव को सावन का महीना इतना प्रिय क्यों है? इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं और मान्यताएं जुड़ी हैं, जो महादेव और सावन के गहरे संबंध को दर्शाती हैं।
वास्तु के अनुसार, भगवान शिव की पूजा में तुलसी दल का प्रयोग नहीं करना चाहिए। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव द्वारा तुलसी के पूर्व जन्म वृंदा के पति जालंधर का वध किए जाने और भगवान विष्णु द्वारा उनका पतिव्रता धर्म भंग करने के कारण वृंदा (तुलसी) ने भगवान विष्णु को श्राप दिया था। शिव पूजन में तुलसी के इस्तेमाल न होने का मुख्य कारण यह है कि तुलसी के पति जालंधर का संहार स्वयं भगवान शिव ने किया था।
सावन का महीना धैर्य, शांति और आत्मसंचनमा का समय माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान झूठ बोलने, गुस्सा करने, अपशब्द कहने या किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। वास्तु के अनुसार, सावन में ब्रह्म मुहूर्त में भगवान शित की पूजा करने से अच्छे फल मिलते हैं। जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। सावन में सात्विक भोजन ही तग्रहण करना चाहिए। इससे सरीर और मन दोनों शुद्ध रहते हैं। इस दौरान तामसिक भोजन जैसे मांस-मदिरा आदि से टूटी बनाकर रसखना चाहिए। सावन में ईशान कोणा यांनी उत्तर-पूर्व दिशा को साफ-स्तंच्छ रखना चाहिए।
स्कंद पुराण में भगवान शिव ने सनत्कुमार को सावन महीने के बारे में बताया कि मुझे श्रावण बहुत प्रिय है। इस महीने की हर तिथि व्रत और हर दिन पर्व होता है, इसलिए इस महीने नियम-संयम से रहते हुए पूजा करने से शक्ति और पुण्य बढ़ते हैं। स्कंद पुराण के अनुसार मरकंडू ऋषि के पुत्र मारकण्डे ने लंबी उम्र के लिए श्रावण में ही घोर तप कर शिवजी की कृपा प्राप्त की थी, इससे यमराज भी मार्कडेय के प्राण नहीं ले सके और वो अमर हो गए इसलिए अकाल मृत्यु, लंबी उम्र पाने और बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए सावन में शिव पूजा का विशेष महत्व है।
सावन में ही शिव जी ने माता पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया था। इसके अलावा शिव पुराण के अनुसार सावन में भोलेनाथ हर साथ पृथ्वी पर अपने ससुराल आते हैं। उनका जलाभिषेक से स्वागत किया जाता है। सावन का महत्व बताते हुए महाभारत के अनुशासन पर्व में अंगिरा ऋषि ने कहा है कि जो इंसान मन और इन्द्रियों को काबू में रखकर एक वक्त खाना खाते हुए श्रावण मास बिताता है, उसे कई तीर्थों में स्नान करने जितना पुण्य मिलता है। स्कंद पुराण के सावन महात्म्य में बताया गया है कि, जो व्यक्ति सावन में नियमों का पालन करता उस पर भगवान शिव की परम कृपा होती है।
सावन का महीना मेंटल हेल्थ के लिए अच्छा माना जाता है। इस महीने में चारों ओर हरियाली रहती है। वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि प्रकृति की ताजगी मन को खुश रखने में अहम भूमिका निभाती है। हरा-भरा वातावरण मन को सुकून देता है। सावन के शुक्रवार को लक्ष्मी जी जुड़े उपाय करना लाभदायी होता है। अगर बहुत मेहनत करने के बाद भी घर में पैसा नहीं टिकता तो सावन शुक्रवार शाम को मां लक्ष्मी की उपासना करें। उन्हें 5 इलायची अर्पित करें और फिर इन इलायची को उठाकर अपने पर्स या तिजोरी में रख दें। आर्थिक संकट से मुक्ति के लिए ये उपाय लाभकारी मानना गया है।