धौलपुर

Dholpur: करोड़ों का सौंदर्यीकरण कार्य नहीं झेल सका पहली बारिश

राजाखेड़ा वार्ड नं 12 स्थित तालाब मछला की पार का सौंदर्यीकरण पूरा होने से पहले ही लगातार विवादों के साए में आ गया है। पहली ही बारिश ने तालाब की दीवार से पहले सुरक्षा पटरियां जमींदोज हो गए, जिससे पालिका के अभियन्ताओं के निर्माण कौशल पर तो सवाल खड़े हो ही गए वहीं नागरिकों में भी आक्रोश फैल गया।
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राजाखेड़ा. पहली बारिश में क्षतिग्रस्त हुआ निर्माण कार्य

Dholpur. राजाखेड़ा. मुख्यालय के शहरी क्षेत्र में वार्ड नं 12 स्थित तालाब मछला की पार का सौंदर्यीकरण पूरा होने से पहले ही लगातार विवादों के साए में आ गया है। पहली ही मामूली बारिश ने तालाब की दीवार से पहले सुरक्षा पटरियां जमींदोज हो गए, जिससे पालिका के अभियन्ताओं के निर्माण कौशल पर तो सवाल खड़े हो ही गए वहीं नागरिकों में भी आक्रोश फैल गया। गौरतलब है कि इस कार्य के निर्माण के साथ ही गंभीर आरोपों के साथ स्थानीय लोग लगातार शिकायतें कर रहे थे, लेकिन पालिका प्रशासन ने न इनकी जांच की न ही कार्रवाई। जिसके चलते यह निर्माण पहली मामूली बारिश में ही जमींदोज होना आरम्भ हो गया।

राजाखेड़ा का रियासतकालीन वर्षा जल निष्क्रमण और संरक्षण तंत्र प्राचीन अभियंत्रिकी की मिसाल माना जाता था, लेकिन प्रभावशालियों के संरक्षण में इन पर हुए अतिक्रमणों ओर बाद में इनके राजनीतिक कारणों से नियमित कर दिए जाने से यह तंत्र पूरी तरह खत्म हो चुका था। जो विशाल तालाब थे वे छोटे गड्ढों में सिमट कर रह गए थे, ऐसे में उनका अस्तित्व बचाए रखने के लिए उनको अमृत सरोवर योजना में सौंदर्यीकरण कर उन्हें तालाब ओर पार्क बना कर पिकनिक स्पॉट बनाने के लिए भूतेश्वर ओर मछला की पार तालाबों को चुना गया था। जिसमें से भूतेश्वर का कार्य दो वर्ष पूर्व पूरा हो गया, लेकिन मछला की पार तालाब के लिए सवा दो करोड़ से अधिक का कार्य स्वीकृत किया गया था, जो अब पूर्ण होने वाला है। लेकिन पालिका के अभियन्ता लगतार शिकायतों के बाद भी इस महत्वाकांक्षी कार्य का उचित गुणवत्तापूर्ण निर्माण नहीं करा सके। नतीजतन यह पूरा होने से पहले ही ध्वस्त होने लगा ओर अब बारिश के बाद तो लगभग पूरा ही धंसता हुआ चला जा रहा है। ऐसे में इस कार्य पर खर्च की जा रही बड़ी राशि के औचित्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं अमृत सरोवर में योजना मे प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षा भी धूमिल हो रही है।

सरकारी निर्माण ही क्यों ढहते हैं ?

स्कूल भवन हों सडक़ें, पार्क हो या तालाब आखिर सरकारी निर्माण ही क्यों दम तोड़ते हैं। लोगों का कहना है कि इन निर्माणों के जिम्मेदार अधिकारियो के निजी निवास व सम्पत्तियों को जांच भी होनी चाहिए कि उनके निजी निर्माण तो सदियों तक के लिए मजबूत हैं, लेकिन सरकारी निर्माण बनने के साथ ही दम तोडऩा क्यों आरम्भ हो जाते हैं। यह सौन्दर्यीकरण कार्य भी एक सप्ताह पहले ही धंसना आरम्भ हो गया था और अब तेज बारिश में पूरा ही धंस गया जिससे इसकी निर्माण गुणवत्ता की पूरी कलई खुल गई है।

इस पूरे कार्य की गहन जांच कराई जाएगी, योजना में कोई लापरवाही मिली तो जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

-दीप्ति देव तहसीलदार एवं अधिशासी अधिकारी न.पा राजाखेड़ा।

Updated on:
10 Aug 2026 07:37 pm
Published on:
10 Aug 2026 07:36 pm