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Dholpur: अलर्ट! ऑनलाइन पैसे लेकर कैश दिया तो बैंक खाता हो सकता फ्रीज

जिले के सरमथुरा कस्वे में अजनबी लोगों से फोनपे और यूपीआई से पैसे का लेन-देन करना बहुत खतरनाक साबित हो रहा है। लालच में आने के बाद आधा दर्जन ई-मित्र संचालकों को लाखों की चपत लग चुकी है। जो फिजूल में साइबर अपराध से जुड़ गए हैं।
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Dholpur news

साइबर थाना धौलपुर

Dholpur, सरमथुरा.क्या आपने कभी किसी अजनबी की मदद करने के लिए उसके फोनपे या यूपीआई से पैसे लेकर बदले में कैश दिया है? अगर हां! तो इस नए स्कैम को खास तौर पर जान लें, वरना बिना किसी गलती के आपका बैंक खाता फ्रीज हो सकता है।

कस्बे में अजनबी लोगों से फोनपे और यूपीआई से पैसे का लेन-देन करना बहुत खतरनाक साबित हो रहा है। लालच में आने के बाद आधा दर्जन ई-मित्र संचालकों को लाखों की चपत लग चुकी है। जो फिजूल में साइबर अपराध से जुड़ गए हैं। साइबर पुलिस की रडार पर आने के बाद इनके बैंक खातों में इतनी राशि को फ्रीज किया हुआ है। अगर आपके पास कोई अजनबी आकर आपको बेबसी दिखाते हुए कहे कि भाई मुझे अर्जेंट कैश चाहिए, मैं अभी फोनपे से तुम्हें ऑनलाइन ट्रांसफर करता हूं, तुम मुझे कैश दे दो। हम मदद समझकर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कराकर कैश में भुगतान कर देते हैं। गंभीर बात यह है कि वह व्यक्ति जो पैसा आपको ऑनलाइन ट्रांसफर करता है, वह वास्तव में साइबर अपराध से चोरी हुआ पैसा होता है। धोखाधड़ी का पैसा आपके खाते में डालकर, आपसे साफ छवि पर दाग लगा देता है और नकदी लेकर घोटाला करने वाला गायब हो जाता है।

जब साइबर पुलिस ऑनलाइन धोखाधड़ी के पैसे को ट्रैक करती है, तो लिंक सीधे आपके खाते तक पहुंचती है। परिणाम के रूप में संदिग्ध लेनदेन के कारण पुलिस आपके पूरे बैंक खाते को तुरंत फ्रीज़ कर देती है। इस स्कैम से सरमथुरा में कई ई-मित्र संचालक लालच में ठगी के शिकार हो गए हंै। इन्होंने कैश राशि देने के बावजूद साइबर पुलिस ने बैंक खाते में राशि को फ्रीज किया हुआ है।

ई-मित्र संचालक बोले: बेबसी दिखाई तो पसीज गया दिल

ई-मित्र संचालक रविन्द्र सिंह, रिंकू सिंह, रमन जिंदल, चांद खान व औरंगजेब खान ने बताया कि शहर में साइबर ठगों बेबसी दिखाकर दुकानदारों को ठगी का शिकार बना चुके हैं। साइबर ठग अलग-अलग दुकानों पर लोगों को जाल में फंसाकर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर कैश राशि लेकर फरार हो गए हैं। ई-मित्र संचालकों ने बताया कि बैंक खाते फ्रीज होने के बाद ही स्कैम में फंसने की जानकारी मिलती है।

साइकोलॉजिकल ट्रिक अपना रहे स्कैमर

डिजिटल युग में स्कैमर लोगों को फंसाने के लिए तकनीकी से ज्यादा साइकोलॉजिकल ट्रिक या यह समझें कि मनोवैज्ञानिक तरकीबों का इस्तेमाल करते हैं। वे इंसान की भावनाओं और लालच का फायदा उठाते हैं। स्कैमर बहुत मीठी और प्रोफेशनल भाषा में बात करते हैं। वे ऐसा व्यवहार करते हैं जिससे लगता है कि आपके बहुत बड़े मददगार हैं। इसी मनोवैज्ञानिक प्रभाव के कारण इंसान जल्दी भरोसा कर लेता है।

इंस्ट्रा पर दोस्ती और दे दिए 50 हजार रुपए

इधर, सोशल मीडिया पर अपरिचित लोगों से दोस्ती करना आपको भारी पड़ सकता है। ऐसा ही $कुछ धौलपुर शहर में हुआ। यहां एक महिला की इंस्ट्रा पर एक शख्स से परिचय हो गया और दोस्ती होने पर उक्त व्यक्ति ने कुछ राशि मांगी। जिस पर करीब 50 हजार रुपए महिला ने उसे ट्रांसफर कर दिए। महिला ने रकम वापस मांगी तो वह मुकर गया और फोन बंद कर दिया। गत दिनों ने पीडि़ता ने एसपी कार्यालय में शिकायत की। जिस पर मामले को साइबर थाने को सौंपा है।