10 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Dholpur: यह कैसी सफाई व्यवस्था…दोपहर 12 बजे तक शहर में नहीं उठता कचरा

धौलपुर शहर की सफाई व्यवस्था सुधरती नहीं दिख रही। कर्मचारियों और संसाधनों का अभाव इस समस्या को दोगुना कर रहा है। हालात यह हैं कि सुबह-सुबह सडक़ों से उठने वाला कचरा शहर में दोपहर 11 से 12 बजे तक नहीं उठता। जिससे पहले से ही बदरंग शहर गंदगी और कीचड़ में लिप्त नजर आता है।
3 min read
Google source verification
Dholpur news

धौलपर, शहर के पटपरा रोड पर दोपहर में लगा कचरे का ढेर

धौलपुर.सफाई कर्मचारियों सहित संसाधनों के अभाव के कारण शहर की सडक़ों से दोपहर ११ से 12 बजे तक कचरे का उठान नहीं हो पा रहा है। जिस कारण जहां स्थानीय दुकानदारों सहित रहवासियों को को परेशानियां उठानी पड़ रही हैं, वहीं शहर के चौक चौराहे गंदगी में लिप्त नजर आते हैं। परिषद की मानें तो कचरा उठाने के लिए जहां कर्मचारियों की कमी है तो ट्रैक्टर, लोडर सहित अन्य संसाधनों का अभाव समस्या को बढ़ावा दे रहा है।

परिषद के दावे और वादे के बावजूद भी शहर की सफाई व्यवस्था सुधरती नहीं दिख रही। कर्मचारियों और संसाधनों का अभाव इस समस्या को दोगुना कर रहा है। हालात यह हैं कि सुबह-सुबह सडक़ों से उठने वाला कचरा शहर में दोपहर 11 से 12 बजे तक नहीं उठता। जिससे पहले से ही बदरंग शहर गंदगी और कीचड़ में लिप्त नजर आता है। देखा जाए तो शहर की सफाई व्यवस्था चार जोनों शहर, कोठी, गुलाब बाग और जिरौली क्षेत्र में बंटी हुई है। इन क्षेत्रों में परिषद ने चौक चौराहों सहित अन्यंत्र जगहों पर लगभग 70 से 80 कचरा प्वाइंट बना रखे हैं। जहां से कचरे का उठान सफाई कर्मचारी कर उसे डंपिंग यार्ड तक पहुंचाते हैं। परिषद ने इन कचरा प्वाइंटों से कचरा भरने के लिए 8 ट्रेक्टर और केवल 3 लोडर लगा रखे हैं, तो वहीं एक ट्रेक्टर पर 2 ही सफाई कर्मचारियों को तैनात किया गया है। देखा जाए तो 80 कचरा प्वाइंटों से कचरा उठान के लिए इससे ज्यादा कर्मी और संसाधनों की आवश्यकता होती है और यही कारण है कि शहर में दोपहर तक सडक़ों से कचरा उठाया जा रहा है।

केवल तीन ऑटो टिपर दौड़ रहे, 17 खराब

नगर परिषद की माली हालत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। जिस कारण शहर का विकास तो दूर रोजमर्रा के कार्य ही ठीक से नहीं हो पा रहे। घर-घर से कचरा उठान के लिए परिषद ने लगभग 20 ऑटो टिपर प्रारंभ की थीं, जो घर-घर से कचरा उठाने का कार्य करती थीं, लेकिन देख-रेख के अभाव के कारण आज केवल 3 ऑटो टिपर ही घर-घर से कचरा उठाने का कार्य कर रही हैं, शेष 17 ऑटो टिपर परिषद के परिसर में कबाड़ा हो रही हैं। इसके अलावा परिषद के 2 डंपर भी खराब हालत में पड़े हुए हैं। अगर परिषद चाहे तो इन डंपरों को सही करा सफाई व्यवस्था में उपयोग कर सकती है, जिससे सफाई व्यवस्था कार्य में भी बेहतरी आएगी, लेकिन ऐसा करे कौन? वहीं खराब हालत में पड़ी यह १७ ऑटो टिपर एक साथ खराब नहीं हुईं, लेकिन परिषद के जिम्मेदरों ने कभी इन खराब ऑटो टिपरों को सही कराने की तरफ ध्यान ही नहीं दिया। यही कारण है कि लोग घरों से निकलने वाले कचरे को सडक़ों या फिर अन्यंत्र जगहों पर फेंकने को मजबूर हो रहे हैं।

कई जगह से दिनभर नहीं उठता कचरा

शहर में सफाई की बदतर व्यवस्था को देखते हुए इसे कर्मचारियों का अभाव कहें या फिर कर्मचारियों की ही उदासीनता, कि शहर के कई जगहों पर कचरा दिन भर पड़ा रहता है। गडऱपुर, बजरिया, शहर, बड़ी फील्ड सहित ऐसे कई कचरा प्वाइंट हैं जहां कचरे का उठान एक-एक, दो-दो दिन तक नहीं होता। तो वहीं कई लोगों ने बताया कि सफाई कर्मचारी सुबह सफाई के दौरान कचरे को नाली या फिर नाले में ही फेंक देते हैं। जिससे नाली और नाले चौक होते हैं और जलभराव की स्थिति निर्मित होती है।

रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था में भी कोताही

नगर परिषद शहर को साफ रखने के लिए कार्ययोजना तो बनाती है, लेकिन उसके जमीनी स्तर निगरानी नहीं होने से वह सफल नहीं हो पाती। नवाचार के तौर पर परिषद ने शहर के कुछ क्षेत्रों में रात्रिकालीन सफाई अभियान प्रारंभ किया था, जो अब भी जारी है, लेकिन यह सफाई अभियान जिन क्षेत्रों में प्रारंभ किया था उनमें से कुछ में तो यह बंद भी हो चुका है तो वहीं जहां अभियान चलाया जा रहा है वहां भी सफाई के दौरान कोताही बरती जा रही है।

सफाई को लेकर थोड़ी जिम्मेदारी हमारी भी

ऐसा नहीं है कि सफाई अव्यवस्था में नगर परिषद ही पूर्ण रूप से जिम्मेदार हो। कहीं न कहीं जिम्मेदार लोगों को भी सोचना होगा कि यह शहर उनका है जहां गंदगी करना यानी अपना घर गंदा करना है, क्योंकि देखने में आता है कि जहां-जहां परिषद के कचरा पात्र रखे होते हैं शहरवासी उनमें कचरा न फेंकर बाहर ही फेंक देते हैं जिस कारण गंदगी को बढ़ावा तो मिलता ही है, बल्कि निराश्रित गोवंश और श्वान उनमें मुंह मारते हैं जो हादसों को भी बढ़ावा देते हैं। इस स्थिति से बचने के लिए लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है।