अतिक्रमण की चपेट में बहाव क्षेत्र
- अपने हिसाब से घुमा दी तो कही सकरी हो गई नहर
- अतिक्रमण की चपेट में बहाव क्षेत्र
धौलपुर. धौलपुर के बाहरी क्षेत्र में पहले सिंचाई के लिए कुछ छोटी नहरें बनी हुई थी। इसमें एक नहर पचगांव की तरफ होते हुए पुलिस लाइन के सामने से नई बसी कॉलोनियों में की तरफ जाती थी। लेकिन अब ये नहर लापता सी हो गई है। हालांकि, कुछ जगह दिखाई देती है तो उसे अपने हिसाब से लोगों ने घुमा दिया तो कहीं पर सकरी हो गई। इसी तरह कुछ जगहों पर नाले भी जमींदोज हो गए। मानसूनी सीजन में जब अधिक बारिश होती है तो निकासी के लिए रास्ता नहीं बचने से पानी कॉलोनियों में घुसता है। वहीं, कॉलोनियों में बनाए ड्रेनेज सिस्टम पहले ही अवरुद्ध पड़े हुए हैं। जिससे पानी निकासी नहीं होने से यह कॉलोनियों में लम्बे समय पर भरा रहता है और आमजन को परेशानी उठानी पड़ती है। लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदार बहाव क्षेत्र और पुरानी नहर व नालों पर हुए अतिक्रमण को हटाने से आंखें मूंदे हुए हैं।
जगदीश तिराहे तक आता था नाला, अब लापता
बता दें बाड़ी रोड किनारे पहले एक नाला बना हुआ था, जो मानसूनी सीजन में अधिक बारिश होने पर पानी बाड़ी रोड की पुरानी चुंगी के पास बने नाले से होकर निकल जाता था। लेकिन अब बाड़ी रोड किनारे बना यह नाला अब लापता है। नाले पर हुए अतिक्रमण को लेकर नगर परिषद ने भी मौन साध रखा है। अब हाल ये है कि छितरिया ताल से पानी ओवरफ्लो होने पर बाड़ी रोड और जगदीश तिराहे से यह सैंपऊ रोड की तरफ प्रवेश कर जाता है। पानी यहां कॉलोनियों में घुसने से आमजन परेशान हैं। वहीं, यहां सडक़ किनारे बना आधा अधूरे नाले को नगर परिषद ने लावारिस छोड़ रखा है।
चिह्नित अतिक्रमणों पर कब होगी कार्रवाई
बता दें कि बहाव क्षेत्र समेत अन्य जगहों पर अतिक्रमण को लेकर जनवरी 2018 में तत्कालीन जिला कलक्टर ने एसडीएम की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। कमेटी में नगर परिषद आयुक्त और सिंचाई विभाग के एक्सईएन सदस्य थे। कमेटी ने 18 से 23 जनवरी तक शहरभर में सर्वे कर 66 अतिक्रमण चिह्नित किए। एसडीएम ने इनके खिलाफ अनुमोदन के लिए कलक्टर को सूची भेजी लेकिन अभी तक इस पर कार्रवाई नहीं हो पाई है। इसी तरह हाईकोर्ट के निर्देश पर नगर परिषद ने कुछ गिने चुने स्थानों पर कार्रवाई अतिश्री कर दी। कई स्थानों पर नालों पर हो रहे अतिक्रमणों को परिषद ने हाथ तक नहीं लगाया।
सीवरेज सिस्टम फेल, खानापूर्ति साबित सफाई
शहर में सीवरेज सिस्टम करीब-करीब फेल साबित हो चुका है। बिना बारिश के भी कई कॉलोनियों में सीवरेज का गंदा पानी ढक्कनों से बाहर आ रहा है। शिकायत पर गाड़ी जाकर पानी निकाल देती हैं लेकिन दो दिन बाद पुराने हालात बन जाते हैं। बताया जा रहा है कि सीवरेज पाइप छोटे होने वह पानी को नहीं निकाल पा रहा है। साथ ही सीवरेज में गाद जमने और सफाई नहीं होने से कई स्थानों पर परेशानी बनी हुई है।