
SHO Devendra Sharma Row: अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में पूर्व इनामी दस्यु जगन गुर्जर की हत्या के बाद हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे थे और पुलिस-प्रशासन ने भी राहत की सांस ली थी। लेकिन तभी बाड़ी कोतवाली के एसएचओ देवेन्द्र शर्मा को पुलिस लाइन अटैच किए जाने के मामले ने सोशल मीडिया पर तूल पकड़ लिया है। समर्थन में आए लोग बहाली की मांग कर रहे हैं और वहीं, दूसरे पक्ष के लोगों ने भी एसएचओ के समर्थन में उतरने वालों पर सोशल मीडिया पर निशाना साधा। पिछले दो दिनों से इस मुद्दे को लेकर माहौल गरमाया हुआ है।
इस पूरे मामले ने जगन गुर्जर की पगड़ी रस्म के बाद मोड़ लिया। रस्म के बाद गुर्जर समाज के लोगों ने बाड़ी कोतवाली पहुंचकर विरोध करने की चेतावनी दी। इसके बाद प्रशासन ने तुरंत रुंधेरा ग्राम पंचायत में समाज के प्रतिनिधियों के साथ लगभग डेढ़ घंटे तक बातचीत की। बैठक में समाज की तरफ से बाड़ी कोतवाली के एसएचओ देवेन्द्र शर्मा को निलंबित करने की मांग रखी गई। जब इस पर सहमति नहीं बन पाई तो पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान ने आरोपों की जांच पूरी होने तक एसएचओ को पुलिस लाइन अटैच करने के निर्देश दिए। सूत्रों के अनुसार सोशल मीडिया पर हलचल होने पर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सीआई शर्मा को बुलाया और मामले में अनुशासन बनाये रखने के निर्देश दिए।
उधर, जगन की मौत के बाद कोमेश गुर्जर ने भी बाड़ी कोतवाली एसएचओ पर लगभग साढ़े तीन महीने पहले जगन गुर्जर पर दर्ज मुकदमे को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे को गलत बताया था। पुत्र आसाराम ने भी बैठक में आरोप लगाए थे।
बता दें, 11 जुलाई को जगन गुर्जर के पैतृक गांव भवूतीपुरा में बारहवीं और पगड़ी रस्म के बाद समाज के लोगों की बाबू महाराज मंदिर में बैठक हुई थी। बैठक में लोगों ने सरकार की ओर से उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिए जाने पर नाराजगी जताई। इसके बाद उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे बाड़ी कोतवाली के बाहर धरने पर बैठेंगे। उसी रात करीब 9 बजे प्रशासन ने सोने का गुर्जा थाना क्षेत्र की रुंधेरा ग्राम पंचायत के सेवा केंद्र में गुर्जर समाज के प्रतिनिधियों, जिला कलक्टर और पुलिस अधीक्षक के बीच बातचीत हुई।
बातचीत के बाद तीन मांगों पर सहमति बनी, जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल वापस लौट गया। समाज की प्रमुख मांग बाड़ी कोतवाली के एसएचओ देवेन्द्र शर्मा को निलंबित करने की थी। इस पर पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान ने आरोपों की जांच पूरी होने तक उन्हें पुलिस लाइन अटैच करने के निर्देश दिए। दूसरी मांग पप्पू गुर्जर को अजमेर जेल से दूसरी जेल में शिफ्ट करने की थी, जिसे पूरा करते हुए उसे दौसा जेल भेज दिया गया। वहीं तीसरी मांग जगन गुर्जर के बेटे आसाराम या कोमेश गुर्जर में से किसी एक को सुरक्षा के लिए हथियार का लाइसेंस देने की थी।
उधर, सोशल मीडिया पर कथित समर्थकों ने एसएचओ का पोस्टर बना कई पोस्ट किए। जिसमें बाड़ी कोतवाली से हटाने पर नाराजगी जताई और देवेन्द्र शर्मा को पुनः थाने पर लगाने की मांग की गई। सीआई शर्मा ने भी मंगलवार को पोस्ट कर घटनाक्रम को प्रशासनिक परिस्थितियां बताते हुए किसी तरह की पोस्ट न कर जांच प्रक्रिया में विश्वास जताने को कहा।