
Rajasthan Sepau Road Repair Viral Video PIC
राजस्थान के धौलपुर जिले के सैपऊ उपखंड क्षेत्र से ग्रामीण सड़कों के निर्माण और उनकी मरम्मत की गुणवत्ता को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और अनोखी तस्वीर सामने आई है। सैपऊ के नगला हरलाल गांव में पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा कुछ समय पहले ही 'मिसिंग लिंक रोड' योजना के तहत एक आरसीसी (RCC) सड़क का निर्माण कराया गया था, लेकिन गारंटी अवधि पूरी होने से पहले ही यह सड़क जगह-जगह से उखड़कर पूरी तरह जर्जर हो गई। ग्रामीणों द्वारा लगातार की गई शिकायतों के बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) ने संबंधित ठेकेदार को सड़क की मरम्मत करने के निर्देश दिए। हालांकि, जब ठेकेदार के मजदूरों ने मौके पर पहुंचकर टूटी हुई गिट्टियों और सीमेंट की परतों के ऊपर पेंट करने वाले बड़े ब्रश से पुताई करना शुरू किया, तो वहां मौजूद ग्रामीणों की आंखें फटी की फटी रह गईं। इस अजीबोगरीब मरम्मत कार्य का एक वीडियो स्थानीय नागरिकों ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया, जो अब सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है और चर्चा का विषय बन गया है।
धौलपुर के ग्रामीण इलाकों को मुख्य मार्गों से जोड़ने के लिए सरकार लाखों-करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत करती है। इसी कड़ी में नगला हरलाल गांव के लोगों को सुगम रास्ता देने के लिए मिसिंग लिंक रोड प्रोजेक्ट के तहत कंक्रीट की मजबूत आरसीसी सड़क बनाई गई थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था, जिसकी वजह से पहली ही कुछ बारिशों में सड़क की ऊपरी सतह पूरी तरह उखड़ गई और वहां केवल धूल और नुकीली गिट्टियां बचीं।
जब सड़क पर चलना दूभर हो गया, तो गांव के लोगों ने पीडब्ल्यूडी के उच्च अधिकारियों से इसकी लिखित शिकायत की थी ताकि ठेकेदार से इसे दोबारा सही कराया जा सके।
शिकायत पर एक्शन लेते हुए PWD विभाग ने ठेकेदार को अपने खर्चे पर डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड के तहत सड़क को सुधारने के लिए भेजा। लेकिन मौके पर जो रिपेयरिंग का काम शुरू हुआ, उसने तकनीकी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
मजदूरों ने सड़क की दरारों को भरने या कंक्रीट की नई परत बिछाने के बजाय एक तसले में लिक्विड घोल तैयार किया और साधारण पुताई वाले ब्रश की मदद से जर्जर सड़क को पोतना शुरू कर दिया।
ग्रामीणों ने जब यह देखा कि कंक्रीट की उखड़ी हुई गिट्टियों को केवल ब्रश से सीमेंट जैसी किसी चीज से चमकाया जा रहा है, तो वे चौंकते हुए ये सब देखते ही रहे।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और ग्रामीणों द्वारा लीपापोती के आरोप लगाने के बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता (AEN) अमित शर्मा ने इस पूरे मामले पर अपनी तकनीकी सफाई पेश की है।
एडिशनल इंजीनियर अमित शर्मा ने ग्रामीणों के भ्रष्टाचार और पुताई करने के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए बताया कि इस जर्जर सड़क पर नियमानुसार 'एपॉक्सी कार्य' कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह कोई साधारण सीमेंट या चूने की पुताई नहीं है, बल्कि कंक्रीट की सड़कों की उम्र बढ़ाने और बारीक दरारों को हमेशा के लिए सील करने की एक अत्यधिक आधुनिक और इंजीनियरिंग पद्धति है।
पीडब्ल्यूडी के तकनीकी जानकारों के अनुसार, जर्जर हो चुकी आरसीसी या कंक्रीट की सड़कों की मजबूती और टिकाऊपन को बढ़ाने के लिए इस विशेष केमिकल कोटिंग का उपयोग किया जाता है
पॉलिमर रेजिन और हार्डनर: एपॉक्सी वास्तव में एक प्रकार का सिंथेटिक बहुलक और एक विशेष केमिकल हार्डनर का गाढ़ा मिश्रण होता है।
कंक्रीट से भी अधिक मजबूती: जब इस सिंथेटिक केमिकल लिक्विड को बारीक गिट्टियों, सैंड या डामर (Bitumen) के साथ मिलाकर सड़क की पुरानी सतह पर फैलाया जाता है, तो यह कंक्रीट की तुलना में 3 गुना अधिक मजबूत बॉन्ड बना लेता है।
वाटरप्रूफ सीलिंग: इसे ब्रश या विशेष रोलर से लगाने का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि कंक्रीट के भीतर की बारीक दरारें पूरी तरह भर जाएं ताकि भविष्य में पानी सड़क के अंदर न जा सके और सड़क पानी के रिसाव से दुबारा न टूटे।
हालांकि, PWD विभाग की इस एपॉक्सी तकनीक की दलील से नगला हरलाल गांव के लोग और स्थानीय जनप्रतिनिधि बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एपॉक्सी कोटिंग केवल उन सड़कों पर कारगर होती है जहां मामूली दरारें आई हों, लेकिन जिस सड़क की गिट्टियां पूरी तरह उखड़कर पाउडर बन चुकी हों, वहां केवल ब्रश से लिक्विड पोत देना सरकारी बजट का सरासर दुरुपयोग है।
ग्रामीणों ने धौलपुर जिला कलेक्टर और पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता (SE) से मांग की है कि इस पूरे मरम्मत कार्य की लैब टेस्टिंग कराई जाए और यदि ठेकेदार द्वारा तकनीकी नियमों की आड़ में केवल औपचारिकता पूरी की जा रही है, तो उसका टेंडर निरस्त कर ब्लैकलिस्ट किया जाए।
Updated on:
10 Jul 2026 03:39 pm
Published on:
10 Jul 2026 03:17 pm
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