धौलपुर

Dholpur: आसमान से बरसा अमृत, सुबह से शाम तक शहर में 19 एमएम बारिश

शहर सहित जिले भर में सुबह 8 बजे से प्रारंभ हुआ बारिश का दौर शाम तक चलता रहा। इस दौरान कभी रिमझिम तो कभी तेज बारिश से शहर तरबतर हो गया। जिससे जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली तो वहीं आसमान से गिरीं बारिश की बूंदे खरीफ फसल के लिए अमृत समान मानी जा रही हैं
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Dholpur. दोपहर में हुई बारिश के दौरान बाड़ी रोड़ से गुजरते वाहन

धौलपुर. रूठा-रूठा मानसून सोमवार रात से ही शहर सहित जिले भर में मेहरबान दिखा। मंगलवार सुबह 8 बजे से सीजन में पहली बार सावन की झड़ी देखने को मिली, जो शाम तक चलती रही। इस दौरान 19 एमएम बारिश दर्ज की गई। तो वहीं आसमान से गिरीं बारिश की बूंदे खरीफ फसल के लिए अमृत समान मानी जा रही हैं, जिससे जहां किसानों के भी चेहरे खिल उठे तो खरीफ की फसल भी दमक उठी।

कमजोर मानसून के कारण जहां आषाढ़ सूखा निकल गया तो, श्रावण से बंधी आस मंगलवार सुबह से राहत देती नजर आई। सुबह 8 बजे से प्रारंभ हुआ बारिश का दौर शाम तक चलता रहा। इस दौरान कभी रिमझिम तो कभी तेज बारिश से शहर तरबतर हो गया। जिससे जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली, वहीं निचले इलाकों सहित कई कॉलोनियों में जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई। सबसे ज्यादा खराब हालत गौशाला, नर्सरी, दारासिंह नगर, मानसरोवर कालोनी और पोखरा सहित उन क्षेत्रों में देखने को मिली जहां जलनिकासी के हाल बेहाल हैं। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक धौलपुर शहर में 19 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। तो वहीं जिले की बात करें तो सैंपऊ में सबसे ज्यादा 34 एमएम, राजाखेड़ा में 25, बाड़ी में 07 और बसेड़ी में 04 एमएम बारिश दर्ज की गई। जिस कारण जिले में बारिश का आंकड़ा 200 एमएम को पार कर 215.9 एमएम पर पहुंच गया। तो वहीं धौलपुर शहर में अब तक 217 एमएम बारिश दर्ज हो चुकी है। हालांकि अभी भी धौलपुर शहर सहित जिला औसत बारिश के मामले में काफी पिछड़ रहा है। मौसम विभाग की मानें तो आगे भी शहर सहित जिले में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश हो सकती है।

खरीफ फसल को मिला अमृत

बारिश की बूंदों से खेतों में खड़ी सूखती खरीफ की फसल को भी नया जीवन मिला। यह बारिश किसानों के लिए बेहद लाभदायक मानी जा रही है। भीषण गर्मी और उमस के कारण खेतों से नमी खत्म होने से फसल के खराब होने की संभावना बढ़ती जा रही थी। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह वर्षा खरीफ फसलों जैसे बाजरा, ज्वार, मूंग, उड़द और तिल के लिए फायदेमंद साबित होगी। खेतों में नमी बढऩे से फसलों की वृद्धि बेहतर होने और सिंचाई की आवश्यकता कम होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार मानसूनी बारिश के कारण खेतों में खड़ी खरीफ फसल के लिए यूरिया की भी आवश्यकता कम होती है, क्योंकि मानसून सीजन के दौरान होने वाली बारिश के कारण हवा में 70 प्रतिशत तक नाइट्रोजन होती है। जो हवा और बारिश के पानी के द्वारा फसल तक पहुंचती और खेतों में खड़ी फसल के लिए अमृत का काम करती है।

Updated on:
04 Aug 2026 07:40 pm
Published on:
04 Aug 2026 07:40 pm