
Tea For Better Brain: आजकल ग्रीन-टी के साथ-साथ वाइट-टी का भी नाम अक्सर सुनने को मिलता है जिसको लेकर लोग उलझन में रहते हैं कि आखिरकार इनमें से कौनसी ज्यादा फायदेमंद है। वास्तव में ग्रीन-टी ( Green Tea ) और वाइट-टी ( White Tea ) दोनों एक ही प्लांट (कैमेलिया सिनेंसिस) की पत्तियां हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि ये पत्तियां शुरुआत में सफेद होती हैं जो बाद में पककर हरी हो जाती हैं। दोनों के लाभ और प्रयोग करने का तरीका लगभग समान होता है। पोषकता की बात करें तो शुरूआती अवस्था में होने के कारण सफेद पत्तियों में पोषक तत्त्वों की मात्रा हरी पत्तियों की तुलना में थोड़ा बहुत होता है।
क्या लाभ हैं ( Tea Benefits )
दोनों टी में एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। साथ ही इनका काम रोग प्रतिरोधक तंत्र को मजबूती देना है जिससे यह शरीर तंत्र में रोगों को बढ़ने या पनपने नहीं देता है। ऐसे में ये टी खराब जीवनशैली के कारण हुई बीमारियां जैसे मोटापा, थायरॉइड, हाई बीपी, आर्थराइटिस, डायबिटिज, हृदय संबंधी बीमारियों आदि को नियंत्रित रखने का काम करती है। फाइटोकेमिकल्स होने के कारण यह कैंसर की रोकथाम में भी मददगार है। चास आपके दिमाग काे सक्रिय करती है ( Tea Boost Brain Function )।
प्रयोग का तरीका ( How To Prepare Tea at Home )
एक कप पानी उबालने के बाद इसमें एक-चौथाई चम्मच सफेद पत्तियां डालें। यदि ताजी पत्तियों का प्रयोग कर रहे हैं तो 7-8 पत्तियां पर्याप्त हैं। उसके बाद 5 से 10 मिनट के लिए उबले पानी को प्लेट से ढंक दें ताकि पत्तियों का पूरा असर पानी में आ जाए। उसके बाद इस पानी को छानकर धीरे-धीरे पिएं। एक कप गर्म पानी में एक टी बैग का भी प्रयोग कर सकते हैं। यह सुबह और शाम दो बार पिया जा सकता है।
ध्यान रखें
उबले पानी में पत्तियों को साथ में न उबालें। इसके बजाय उबले में कुछ पत्तियों को डालकर रसोई को ढक दें। यदि आप डायबिटीज के मरीज हैं तो इसमें चीनी का प्रयोग बिल्कुल न करें। सामान्य लोग व कोई अन्य बीमारी से पीड़ित रोगी भी बिना चीनी के पीए हैं। अगर जरूरत महसूस हो तो बहुत कम मात्रा में चीनी लें।
कौन न लें
जिनको इससे सभी हो या जिन्हें अल्सर आदि की समस्या हो वे न पिएं।