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Health News: आयरन की कमी को पूरा करने के लिए लोहे के बर्तन में पकाएं खाना

Health News: स्वस्थ शरीर के लिए खान-पान पर नियंत्रण होना बेहद जरुरी है। शरीर में गलत खानपान व खराब जीवनशैली से पोषक तत्त्वों व आयरन की कमी होना आम बात है। ऐसे में लोहे के बर्तनों में पका हुआ भोजन सेहत के लिए फायदेमंद रहता है।
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Updated: 26 Jun 2021, 10:52 PM IST
Sources of Iron
Sources of Iron: आयरन लेवल बढ़ाने के लिए आज से ही अपने डाइट में शामिल करें यह चीजें

Health News: स्वस्थ शरीर के लिए खान-पान पर नियंत्रण होना बेहद जरुरी है। शरीर में गलत खानपान व खराब जीवनशैली से पोषक तत्त्वों व आयरन की कमी होना आम बात है। ऐसे में लोहे के बर्तनों में पका हुआ भोजन सेहत के लिए फायदेमंद रहता है। हमारे यहां प्राचीन समय से ही लोहे की कढ़ाई आदि बर्तनों में खाना बनाने की परंपरा रही है। आइए जानते हैं इसके बेहतरीन फायदे ...

आयरन की पूर्ति
लोहे की कढ़ाई में खाना बनाने से उसमें मौजूद लौह अंश भोजन में मिल जाते हैं। यदि कढ़ाई में सब्जी को थोड़ी देर पड़ा रहने दिया जाए तो उसका रंग हल्का काला हो जाता है जो शरीर के लिए फायदेमंद होता है। लगभग सभी हरी सब्जियां आयरन युक्त होती हैं। लोहे की कढ़ाई में बनाने पर लौह तत्व में वृद्धि होकर अधिक फायदेमंद हो जाती हैं।

बर्तन में जंग लगने पर
जंग की हल्की परत आने पर बर्तन को हल्का सा पोंछकर प्रयोग करना चाहिए। इससे जंग के हल्के अंश भोजन के साथ मिलकर शरीर में पहुंचते हैं जो रक्तवृद्धि करने में मददगार होते हैं। लेकिन मोटी परत होने पर बर्तन को अच्छे से धोकर ही प्रयोग करें। दूध ज्यादा देर न रखें : लोहे के बर्तन में दूध उबाला जा सकता है लेकिन अधिक देर बर्तन में नहीं छोडऩा चाहिए। दूध प्रोटीनयुक्त होता है। उसमें आयरन नहीं होता इसलिए ये बर्तन से मिलने वाले आयरन को अवशोषित नहीं कर पाता। इससे बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है।

सामान्य स्थिति
शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा उम्र के हिसाब से अलग-अलग होती है। सामान्यत: इसकी मात्रा पुरुषों में 14-17 ग्राम प्रति डेसीलीटर व महिलाओं में 12-16 ग्राम प्रति डेसीलीटर के बीच होनी चाहिए। इससे ऊपर के स्तर पर ज्यादा आयरन न लें वर्ना ब्लड कैंसर का खतरा हो सकता है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
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