डूंगरपुर

Dungarpur: चुनावी स्याही के साथ सेल्फी का ख्वाब अधूरा, दो वार्डों में नहीं हुई वोटिंग, नए वोटर मायूस

डूंगरपुर के वार्ड 23 और 28 में प्रत्याशियों के निर्विरोध चयन ने चुनावी उत्साह पर विराम लगा दिया। खासकर पहली बार वोटर बने युवाओं को मतदान केंद्र, वोटिंग मशीन और उंगली पर स्याही का अनुभव लेने के लिए अब विधानसभा चुनाव का इंतजार करना होगा। ऐसे में इन इलाकों में सन्नाटा छाया है।
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Sep 09, 2026
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Dungarpur: वार्ड में छाया सन्नाटा (फोटो-पत्रिका)

डूंगरपुर। नगर निकाय चुनाव में मतदान को लेकर शहर के हर वार्ड में उत्साह नजर आ रहा है, लेकिन डूंगरपुर के दो वार्ड ऐसे हैं, जहां चुनावी सरगर्मी शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई। वार्ड 23 और 28 में प्रत्याशियों के निर्विरोध चयन के चलते मतदान नहीं हुआ। ऐसे में पहली बार मतदाता बने युवाओं का वोट डालने, उंगली पर स्याही लगवाने और सेल्फी लेने का सपना अधूरा रह गया। अब इन नए मतदाताओं को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए आगामी विधानसभा चुनाव का इंतजार करना होगा।

शहर के वार्ड 23 में पुराने शहर का भोईवाड़ा, कोतवाली, जामा मस्जिद, खटीकवाड़ा और कलालों का मंदिर क्षेत्र शामिल है। यहां करीब 1084 मतदाता पंजीकृत हैं। चुनाव में भाजपा की ओर से मनन कलासुआ और कांग्रेस की ओर से गणेश कटारा मैदान में थे। नामांकन प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन आपराधिक मामले से जुड़ी जानकारी छिपाने के कारण रद्द हो गया। इसके बाद भाजपा प्रत्याशी मनन कलासुआ का निर्विरोध चयन हो गया और वार्ड में मतदान की आवश्यकता नहीं रही।

निर्विरोध चयन से खत्म हुई चुनावी हलचल

इसी तरह वार्ड 28 में भी प्रत्याशी के निर्विरोध चयन के कारण मतदाताओं को मतदान का मौका नहीं मिला। दोनों क्षेत्रों में चुनावी प्रक्रिया का प्रमुख हिस्सा यानी मतदान नहीं होने से नए मतदाताओं में खास तौर पर मायूसी दिखाई दे रही है।

मोहल्लों में चुनावी चहल-पहल गायब

निर्विरोध चयन के बाद भोईवाड़ा और विजयगंज कॉलोनी में चुनावी माहौल पूरी तरह शांत है। न राजनीतिक दलों के झंडे-बैनर दिखाई दे रहे हैं और न ही चुनाव कार्यालय नजर आ रहे हैं। जनसंपर्क और बैठकों का दौर भी नहीं चल रहा। आम दिनों की तरह लोग अपने कामकाज में व्यस्त हैं।

पहली बार वोट डालने का उत्साह हुआ मायूसी में तब्दील

भोईवाड़ा निवासी मोनित भोई इस साल 18 वर्ष की उम्र पूरी करने के बाद पहली बार मतदाता बना था। चुनाव से पहले उसने बीएलओ के माध्यम से अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाया था। निकाय चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद उसे पहली बार मतदान करने का खासा उत्साह था। मोहल्ले में चुनावी चर्चाओं के बीच वह भी इलाके की समस्याओं और उनके समाधान को लेकर चर्चा कर रहा था।

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उंगली में चुनावी स्याही का सपना अधूरा

लेकिन नामांकन रद्द होने के बाद प्रत्याशी का निर्विरोध चयन हो गया और मतदान नहीं हुआ। इससे पहली बार वोट डालने की उसकी उम्मीद टूट गई। उसका कहना है कि पहली बार वोटर कार्ड बनवाने के बाद बूथ पर जाकर मतदान करने और उंगली पर चुनावी स्याही लगवाने की इच्छा थी। इसके बाद स्याही लगी उंगली के साथ सेल्फी लेने का सपना भी था, लेकिन अब यह मौका विधानसभा चुनाव में ही मिल पाएगा।