डूंगरपुर

Dungarpur : ‘मैं दुर्लभ पीला पलाश हूं, जीना चाहता हूं…’, जानिए इस अद्भुत पेड़ की दर्दभरी कहानी

Yellow Palash Tree : 'मैं दुर्लभ पीला पलाश हूं, जीना चाहता हूं।' मेरी मौजूदगी डूंगरपुर-बांसवाड़ा नेशनल हाइवे 927 ए पर सरकण घाटी से कुछ ही दूरी पर हैं। जानिए दुर्लभ पीला पलाश की दर्दभरी कहानी हमारी जुबानी।

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फाइल फोटो पत्रिका

Yellow Palash Tree : 'मैं दुर्लभ पीला पलाश हूं।' मेरी मौजूदगी डूंगरपुर-बांसवाड़ा नेशनल हाइवे 927 ए पर सरकण घाटी से कुछ ही दूरी पर हैं। मैं वही पीला पलाश हूं, जिसे मेरी मौजूदगी की जानकारी मिलते ही एक बार देखने जरूर आता है। मदर ट्री के रूप में मैं संरक्षित की श्रेणी में हूं। प्रकृति ने मुझे लाल नहीं, बल्कि सोने जैसा पीला रंग बख्शा है।

मेरी रगों में वहीं जीवन दौड़ता है जो इस धरा की पहचान है। साल 2022 का वह दिन आज भी मुझे याद है, जब नेशनल-हाइवे 927 ए के विस्तार के लिए मशीनें मेरे पास तक पहुंच गई थीं। तब आप इंसानों ने ही मुहिम छेड़ी थी। आपने मुझे अपना माना, मुझे कटने से बचाया और मुझे संरक्षित घोषित किया। मदर ट्री के साथ ही एक तख्ती भी लगाई गई, उस वक्त लगा था कि अब मैं सुरक्षित हूं, मैं अपनी जड़ों को और गहरा फैला पाऊंगा।

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पर आज… आज मेरा दम घुट रहा है। मदर ट्री व संरक्षण से जुड़ी तख्ती गायब है। मेरे चारों ओर की पहाड़ियां, जो मेरा सुरक्षा कवच थीं, उन्हें खनन ने छलनी कर दिया है। खनन के बाद निकलने वाली कंक्रीट और मिट्टी अब मेरे तने तक आ पहुंची है। मेरी सांसें धूल से भर गई हैं। मेरे आसपास की जमीन खोद दी गई है। मुझे डर लगता है कि अगली बारिश में मेरी जड़ें मेरा साथ छोड़ देंगी।

क्षेत्र को नो-माइनिंग ज़ोन घोषित किया जाए

मैं अब एक सुरक्षित वृक्ष नहीं, बल्कि कंक्रीट के ढेर के बीच फंसा एक कैदी सा महसूस कर रहा हूं। दुर्लभ धरोहर को बचाने के लिए केवल तख्ती लगा देना काफी नहीं है। मेरे तने के आस-पास के क्षेत्र को नो-माइनिंग ज़ोन घोषित किया जाए।

तने के पास जमा कंक्रीट और मिट्टी को तुरंत हटाया जाए ताकि जड़ों काे सुरक्षा मिल सके। कटाव को रोकने के लिए पेड़ के चारों ओर एक मजबूत पत्थर की दीवार बनाई जाए ताकि मिट्टी न खिसके।

एक बार सर्वे जरूर करें जिम्मेदार

जिम्मेदार एक बार सर्वे जरूर करें कि मेरा अस्तित्व खतरे में तो नहीं हैं। इसके साथ ही कृषि वैज्ञानिकों की मदद से मेरे बीजों से नए पौधे तैयार किए जाएं ताकि मेरा कुनबा भी वागड़ में बढ़े। मैं सिर्फ एक पेड़ नहीं, वागड़ की विरासत हूं। यदि मैं मिट गया, तो प्रकृति का एक दुर्लभ रंग हमेशा के लिए फीका पड़ जाएगा। इसलिए समय रहते जागना होगा।

लाल पलाश बहुतायत, पीले सीमित

जनजाति बाहुल्य डूंगरपुर-बांसवाड़ा सहित प्रदेश के वन क्षेत्रों में लाल पलाश के पेड़ बहुतायत है। वहीं पीले पलाश के पेड़ की संख्या गिनती की है। डूंगरपुर में पीले पलाश के पेड़ एक दर्जन तक होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

डूंगरपुर-बांसवाड़ा मार्ग पर लाल पलाश जगह-जगह नजर आ जाएंगे, लेकिन पीले पलाश का पेड़ सरकण घाटी के समीप ही एक छोर पर है। इस पर इन दिनों पीले पुष्प दूर से ही लोगों को आकर्षित करते हैं।

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Published on:
24 Feb 2026 12:23 pm
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