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Dungarpur : डूंगरपुर के इस कस्बे में ₹47 लाख से बन रहा आयुष भवन, लगभग 10 गांवों को मिलेगा सीधा फायदा

Dungarpur : डूंगरपुर के गलियाकोट कस्बे में 47 लाख रुपए से आयुष भवन बन रहा है। इस आयुष भवन से लगभग 10 गांवों को सीधा फायदा मिलेगा।

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Dungarpur Chautari Ayush Bhavan being constructed at a cost of Rs 47 lakh in Galiakot 10 villages will get direct benefit

चीतरी, गलियाकोट में 47 लाख की लागत से निर्माणाधिन आयुष भवन। फोटो पत्रिका

Dungarpur : गलियाकोट कस्बे में लगभग 47 लाख रुपए की लागत से नए आयुष भवन का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इस निर्माण से गलियाकोट और उसके आसपास के लगभग 10 गांवों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। ग्राम पंचायत की ओर से गलियाकोट राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पास ही आयुष भवन के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई है। प्रशासक तुलसीराम मईड़ा ने बताया कि इस भवन के बनने से ग्रामीणों को आयुर्वेदिक उपचार के साथ-साथ एलोपैथिक सहित अन्य चिकित्सा सुविधाओं के लिए अब दूर नहीं जाना पड़ेगा।

जुईतलाई, सीलोही, उदैया, वणियाप, गढ़ा जसराजपुर और कसारिया जैसे गांवों के ग्रामीणों को इस सुविधा का विशेष लाभ मिलेगा। ग्रामीणों द्वारा आयुष भवन की मांग काफी लम्बे समय से की जा रही थी। इससे पहले, आयुष भवन का संचालन निर्माणाधीन भवन के ठीक सामने बंद पड़े विद्यालय भवन के कक्षा कक्ष में किया जा रहा था। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस संबंध में टेंडर जारी किया गया।

दो वर्षों तक नहीं दिया ध्यान

आयुष भवन के निर्माण से रोगियों को अत्याधुनिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से इलाज करवाने की सुविधा मिलने लगेगी और उन्हें इलाज के लिए दूर-दराज भटकना नहीं पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में तत्कालीन सरकार द्वारा गलियाकोट में ब्लॉक स्तरीय आयुष औषधालय भवन के लिए 2.45 करोड़ रुपए का बजट काफी लंबे समय से की जा रही थी।

हालांकि, प्रशासनिक उदासीनता और उपयुक्त स्थान के चयन में देरी के कारण दो वर्षों तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। अब, वर्ष 2025 में सरकार की नई नीतियों और ग्रामीणों की निरंतर मांग के बाद, गलियाकोट में आयुष भवन निर्माण के लिए लगभग 47 लाख रुपए का नया बजट स्वीकृत किया गया है।

जिला चिकित्सालय में बदहाल व्यवस्था, जताई नाराजगी

वहीं दूसरी तरफ सागवाड़ा में पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय जिला चिकित्सालय की अव्यवस्थाओं को लेकर पूर्व सांसद कनकमल कटारा ने नाराजगी जताई। अस्पताल पहुंचकर उन्होंने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और खामियों पर अस्पताल प्रशासन को फटकार लगाई। पूर्व सांसद कटारा के चिकित्सालय पहुंचने पर मुख्य द्वार पर ही दो पहिया वाहन खड़े मिले। वाहनों के खड़े होने से चिकित्सालय में घुसना तक मुश्किल हो गया।

इस दौरान सामने आया कि वाहन मनमर्जी से खड़े रहने से रोगियाें एवं उनके साथ आए तिमारदारों को परेशानी उठानी पड़ती है। चिकित्सालय में वाहन पार्किंग की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं होने से दिनभर बेतरतीब वाहन खड़े रहते हैं। चिकित्सालय स्टॉफ के वाहन मुख्य द्वार पर खड़े रहते हैं।