
कोकापुर. युवा तपेश चौबीसा। फोटो पत्रिका
Tapesh Chaubisa : अक्सर पर्यटन की तस्वीर आलीशान होटलों और भीड़-भाड़ वाले स्थलों तक सीमित दिखती है, लेकिन राजस्थान के वागड़ अंचल से निकले तपेश चौबीसा ने इस सोच को नई दिशा दी है। छोटे से गांव पाडवा के तपेश ने ग्रामीण और साइकिलिंग पर्यटन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनका सफर अपनी जड़ों से जुड़े रहकर दुनिया तक संस्कृति पहुंचाना है। तपेश ने ग्रामीण जीवन के मूल्यों को समझा। वर्ष 2014 में नई दिल्ली स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड ट्रेवल मैनेजमेंट से पर्यटन प्रबंधन की शिक्षा प्राप्त करने के बाद, उन्होंने "सस्टेनेबल एवं ग्रामीण पर्यटन" की अवधारणा पर कार्य शुरू किया और साइकिलिंग हॉलिडे इंडिया की स्थापना की। यह मंच लोगों को भारत की वास्तविक संस्कृति और ग्रामीण जीवन से जोड़ता है, जिसकी यात्राएं राजस्थान, लद्दाख, हिमालय व पूर्वोत्तर भारत सहित कई क्षेत्रों तक फैली हैं। पर्यटक इनमें स्थानीय जीवन का हिस्सा बनते हैं।
तपेश चौबीसा साइकिलिंग को दुनिया समझने का माध्यम मानते हैं। हाल ही में उन्होंने अमृतसर के अटारी बॉर्डर से अरुणाचल प्रदेश के तेजू तक लगभग 4000 किलोमीटर की यात्रा 40 दिनों में पूरी की। इसके अलावा उन्होंने उदयपुर-दिल्ली (520 किमी), गोवा-मुंबई (400 किमी), मनाली-लेह (440 किमी), पांडिचेरी-कोच्चि (560 किमी) तथा जैसलमेर-उदयपुर (390 किमी) जैसी लंबी यात्राएं भी की है।
भारत के अलावा थाईलैंड, कंबोडिया और वियतनाम में भी साइकिल यात्राएं कर उन्होंने अपने अनुभवों को वैश्विक स्तर तक पहुंचाया। वर्तमान में तपेश वागड़ क्षेत्र में ग्रामीण और कृषि पर्यटन को बढ़ावा दे रहे है। अपने "जेरा जैविक कृषि फार्म एवं लेकसाइड स्टे, पाडवा" के माध्यम से वे किसानों के साथ मिलकर जैविक खेती, ग्रामीण पर्यटन और एग्रो-टूरिज्म के नए मॉडल विकसित कर रहे है।
उनके प्रयासों से जर्मनी, फ्रांस, यूके, अमेरिका और इजराइल जैसे देशों के पर्यटक वागड़ पहुंच रहे है, जिससे स्थानीय किसानों की आय बढ़ रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है।
प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार इस वर्ष वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना-2026 के तहत कुल 56 हजार बुजुर्गों को देश और विदेश के तीर्थ स्थलों की यात्रा राजकीय व्यय पर कराएगी। इसमें 50,000 ट्रेन से एवं 6,000 हवाई जहाज से यात्रा करेंगे। यात्रियों का चयन जिला मुख्यालयों पर जिला स्तरीय कमेटी की ओर से लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा। चयनित सूची जिला कलक्टर कार्यालय, देवस्थान विभाग के कार्यालय और आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करवाई जाएगी।
योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो आगामी 10 जून तक चलेगी। इस बार नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर की हवाई यात्रा भी होगी। देवस्थान विभाग की ओर से संचालित योजना की शुरुआत वर्ष 2013 में केवल रेल यात्रा से हुई थी, जिसे वर्ष 2016 से विस्तार देकर रेल के साथ-साथ हवाई यात्रा से भी जोड़ दिया गया।
Updated on:
28 May 2026, 9:38 AM IST
Published on:
28 May 2026, 9:37 AM IST
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