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VLTD : 10 जून तक राजस्थान में सभी खनिज परिवहन वाहन में जीपीएस अनिवार्य, खनन विभाग की नई व्यवस्था

VLTD : खनन विभाग की नई व्यवस्था के तहत 10 जून तक राजस्थान में सभी खनिज परिवहन वाहन में जीपीएस आधारित वीएलटीडी और आरएफआईडी उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। बगैर वीएलटीडी ई-रवन्ना नहीं मिलेगा।

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Rajasthan mining department New arrangement 10 June GPS mandatory in all mineral vehicles

डूंगरपुर जिले में खनन विभाग का ऑफिस। फोटो पत्रिका

VLTD : डूंगरपुर जिले सहित पूरे प्रदेश में अवैध खनन और खनिज परिवहन में हो रही गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए खान एवं पेट्रोलियम विभाग ने तकनीकी नवाचार किया है। अब खनिज परिवहन में उपयोग होने वाले सभी वाहनों में जीपीएस आधारित व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) और आरएफआईडी उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया है। बिना जीपीएस लगे वाहनों को अब ई-रवन्ना जारी नहीं किया जाएगा। विभाग की इस नई व्यवस्था से खनिज परिवहन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल निगरानी में आ जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि इससे खनिज की मात्रा, परिवहन मार्ग और गंतव्य तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी तथा अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। खान विभाग ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सभी माइनिंग लीज धारकों और वे-ब्रिज (धर्मकांटा) संचालकों की बैठक लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

इसके तहत प्रदेशभर में शिविर आयोजित कर वाहनों में जीपीएस और आरएफआईडी उपकरण लगाए जाएंगे। डूंगरपुर में 25 मई तथा सागवाड़ा में 27 मई को विशेष शिविर होंगे। विभाग के अनुसार 10 जून तक सभी वाहनों का पंजीयन कर उपकरण लगवाना अनिवार्य होगा। निर्धारित समय सीमा तक उपकरण नहीं लगाने वाले वाहनों का ई-रवन्ना जारी नहीं किया जाएगा, जिससे खनिज परिवहन पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।

वे-ब्रिज ऑटोमेशन भी होगा लाइव

नई व्यवस्था के तहत वे-ब्रिज ऑटोमेशन सिस्टम को भी लाइव किया जाएगा। इससे खनिज से भरे वाहनों का वजन सीधे ऑनलाइन सिस्टम से जुड़ जाएगा और परिवहन प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा। विभाग का मानना है कि इससे वजन में हेराफेरी और फर्जी बिलिंग जैसी शिकायतों पर भी रोक लगेगी।

जीपीएस निगरानी से ऐसे रुकेगा अवैध परिवहन

जीपीएस आधारित ट्रैकिंग प्रणाली से अधिकारी खनन स्थल से लेकर अधिकृत गंतव्य तक वाहनों की वास्तविक समय में निगरानी कर सकेंगे। ई-रवन्ना प्रणाली से जुड़े आरएफआईडी टैग के माध्यम से वाहन की पहचान और परिवहन संबंधी जानकारी डिजिटल रूप से सत्यापित होगी। इससे फर्जी ट्रांजिट पास, नकली चालान और अनधिकृत मार्गों का उपयोग करना मुश्किल हो जाएगा। अधिकारियों के अनुसार नई तकनीक से संदिग्ध गतिविधियों, बार-बार रूट बदलने और बीच रास्ते में अनावश्यक ठहराव की पहचान भी आसानी से हो सकेगी।

विशेष रूप से उन क्षेत्रों में निगरानी और सख्त होगी जहां अवैध खनन की लगातार शिकायतें मिलती रही हैं। विभाग का दावा है कि नई प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ेगी, जवाबदेही तय होगी और सरकार की रॉयल्टी वसूली में भी सुधार आएगा। साथ ही खनिज चोरी और अवैध परिवहन पर प्रभावी अंकुश लग सकेगा।

आज से होंगे शिविर

नए आदेश के तहत माइनिंग लीज धारकों और वे-ब्रिज संचालकों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। खनिज परिवहन में उपयोग होने वाले सभी वाहनों में जीपीएस लगाना अनिवार्य किया गया है। 25 मई को डूंगरपुर और 27 मई को सागवाड़ा में शिविर लगाए जाएंगे।
घनश्याम सिंह, जिला माइनिंग अधिकारी डूंगरपुर