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Rajasthan : 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के मोबाइल उपयोग पर लगाई पाबंदी, महासमिति ने लिए कई बड़े फैसले

Rajasthan : राजस्थान आदिवासी महासमिति ने पूर्ण शराबबंदी, शादियों में फिजूलखर्ची व डीजे पर रोक तथा सोने के आभूषणों के स्थान पर केवल चांदी के जेवरातों को सामाजिक मान्यता देने का निर्णय लिया।

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Rajasthan adivasi Mahasabha big decisions under 18 year age children mobile phone use ban

सरोदा. कार्यक्रम में समाज के लोग। फोटो पत्रिका

Rajasthan : डूंगरपुर के सरोदा में राजस्थान आदिवासी महासमिति ने स्थापना दिवस सोमवार को नानेला फला बुचिया बड़ा पाल खडलई कांठल में सामाजिक संकल्पों के साथ मनाया। प्रदेशाध्यक्ष सुन्दरलाल परमार की अध्यक्षता एवं बाबूलाल ताबियाड के मुख्य आतिथ्य में हुए कार्यक्रम में राजस्थान, गुजरात एवं मध्यप्रदेश से बड़ी संख्या में साधु-संत, भगत, गमेती, जनप्रतिनिधि एवं युवाओं ने भाग लिया। महासम्मेलन में लगभग 10 हजार से अधिक समाजबंधुओं की उपस्थिति में समाज सुधार एवं युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कई ऐतिहासिक निर्णय सर्वसम्मति से पारित किए गए।

महासमिति ने समाज में पूर्ण शराबबंदी लागू करने, शादियों में फिजूलखर्ची एवं डीजे पर रोक लगाने तथा सोने के आभूषणों के स्थान पर केवल चांदी के जेवरातों को सामाजिक मान्यता देने का निर्णय लिया। इसके अलावा 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के मोबाइल उपयोग, बिना लाइसेंस वाहन चलाने एवं बाइक रेसिंग पर भी प्रतिबंध लगाने का संकल्प लिया। मृत्यु के बाद दी जाने वाली पारंपरिक कपड़ा प्रथा को बंद करने का निर्णय भी लिया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाओं एवं स्कूटी प्राप्त मेधावी बालिकाओं का सम्मान किया गया। अंत में समाज सुधार संबंधी निर्णयों को धरातल पर लागू करने की शपथ दिलाई गई।

आठ वर्ष से नहीं बना नाला, गमरेश्वर तालाब में जा रहा गंदा पानी

सागवाड़ा में एक ओर सरकार जल संरक्षण को लेकर वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान को लेकर बड़े बड़े आयोजन करवा रही है। वहीं, सागवाड़ा शहर का गमरेश्वर तालाब प्रदूषण और अतिक्रमण की दोहरी मार झेल रहा है। शहर के बीच बहने वाले वर्षों पुराने प्राकृतिक नाले से छेड़छाड़ कर तालाब पेटे में मिट्टी भराव कर कच्ची सडक़ बना दी गई है। इससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ने के साथ नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी खतरा बढ़ गया है।

शहर के माड़वी चौक, कंसारा चौक, पूजारवाड़ा, जैन बोर्डिंग, बोहरावाड़ी, भोईवाड़ा पटेलवाड़ा मोहल्लों में बनी नालियों का पानी गमरेश्वर तालाब में आकर मिल रहा है। वर्ष 2017-18 में करीब 17 लाख रुपया खर्च कर नालियों का पानी गमरेश्वर तालाब में जाने से रोकने के लिए तालाब के किनारे-किनारे नाला निर्माण किया। बीच में खातेदारी जमीन आ जाने से कार्य रुक गया। करीब आठ वर्ष बाद भी नगरपालिका की ओर से कोई पहल नहीं की गई व आज भी करीब 150 मीटर नाले का काम अटका हुआ है।

हालत ये है कि आधे सागवाड़ा शहर की नालियों का पानी गमरेश्वर तालाब में जाकर मिल रहा है। नालियों में बह कर आ रहे प्लास्टिक के कप एवं गिलास तालाब में एकत्र हो रहे हैं। इससे तालाब का पानी काला पड़ने लगा है। आसपास दुर्गंध फैल रही है। नागरिकों का कहना है कि शीघ्र हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो क्षेत्र जलभराव, संक्रामक बीमारियों और पर्यावरणीय क्षति से जूझेगा। शहरवासियों ने उपखण्ड अधिकारी एवं नगरपालिका से मांग की है कि प्राकृतिक नाले का निर्माण करा अवैध निर्माण की जांच कराई जाए।