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Kota : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बड़ा बयान, गाय को मां कहने का साहस क्यों नहीं दिखाती सरकारें?

Kota : उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पत्रकार के पूछे सवाल पर सवाल किया कि गाय को मां कहने का साहस सरकारें क्यों नहीं दिखाती हैं?

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Kota News Shankaracharya Avimukteshwarananda Saraswati big statement Why do not governments show courage to call cow mother

उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। फोटो पत्रिका

Kota : उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शनिवार को कोटा पहुंचे। विनोबा भावे नगर क्षेत्र स्थित दशनाम गोस्वामी समाज के भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पत्रकारों से गो रक्षा, शिक्षा, मिलावट समेत विभिन्न विषयों पर चर्चा की। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि सरकार जो कार्य कर रही है, सब अच्छे हो सकते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि सरकार आज गाय को मां नहीं कह पा रही। हम कह रहे हैं कि गाय को पशु की सूची से हटाओ और मां का दर्जा दो। आखिर प्रदेश या अन्य प्रदेशों की सरकारों को गाय को मां कहने में कहां परेशानी है? हमारी संस्कृति, इतिहास में गाय को मां का दर्जा दिया गया है।

आज भी अंग्रेजीयत हावी

दुख की बात है कि आज भी अंग्रेजीयत हावी है। आजादी के बाद भी गाय को पशु माना जा रहा है और गो मांस बेचा जा रहा है, यह बड़ा प्रश्न है। इससे लगता है कि ये सरकारें भारतीय सभ्यता, संस्कृति व धर्म की सरकारें नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कुछ संस्थान ऐसे हैं, जो अपने आप को हिंदू कहते हैं, लेकिन गो माता की रक्षा नहीं कर पा रहे।

हिंदू राष्ट्र : पहले गो माता की रक्षा का कानून बनाएं

हिन्दू राष्ट्र बनने के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारत हिन्दू राष्ट्र बने, यह किसे अच्छा नहीं लगेगा, लेकिन अभी धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, जहां गायों को काटा जा रहा है। इससे कितनी तकलीफ हो रही है, हिंदू राष्ट्र बनने के बाद भी यह क्रम जारी रहा तो कैसा लगेगा। जो हिन्दू राष्ट्र बनाने की बात करते हैं, उन्हें सबसे पहले गो माता की रक्षा का कानून बनवाना चाहिए।

युद्ध : विद्यानों की भूमिका महत्वपूर्ण

वर्तमान में युद्ध के हालातों को लेकर उन्होंने कहा कि देश के विद्वानों को सही और गलत पर अपना मत रखना चाहिए। न्याय व अन्याय को परिभाषित करेंगे तो अन्याय करने वालों पर दबाव बनेगा।

कोचिंग स्टूडेंट्स : धैर्य और आत्मविश्वास का पाठ भी पढ़ाएं

कोटा में आने वाले हजारों कोचिंग स्टूडेंट्स को सफलता की चाबी उपलब्ध करवाने के साथ धैर्य और विश्वास का पाठ पढ़ाने की जरूरत है। बच्चों को बताया जाए कि एक बार की असफलता से जीवन असफल नहीं होता, असफल हो भी जाएं तो उन बच्चों के साथ खड़ें हों, ताकि बच्चों का आत्मविश्वास बना रहे।

धर्म : दिखावे व मिलावट पर लगे रोक

शंकराचार्य ने मिलावटखोरी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हम नकली घी का दीप जलाएंगे, अशुद्ध सामग्रियों से बना भोग लगाएंगे तो कहां से भगवान की कृपा होगी? मिलावट पर रोक लगाने की जरूरत है। आज पूजा-पाठ धर्म में दिखावा हो रहा है, जो गलत है। धर्म के नाम पर दिखावा गलत है।