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Rajasthan : राजस्थान के इस समाज ने लिया बड़ा फैसला, शादी-ब्याह व जन्मदिन पर अब नहीं कटेगा ‘केक’

Rajasthan : ओबरी चौखले के कलाल समाज ने एक बैठक कर यह फैसला लिया कि शादी-ब्याह व जन्मदिन पर अब 'केक' नहीं कटेगा। साथ ही सगाई में सिर्फ श्रीफल और चांदी का सिक्का दिया जाएगा।

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Rajasthan Kalal community took big decision weddings and birthdays no cake cutting

ओबरी. बैठक में चर्चा करते कलाल समाज के लोग। फोटो पत्रिका

Rajasthan : कलाल समाज में बढ़ते फिजूलखर्च को रोकने और सामाजिक कुरीतियों को जड़ से मिटाने के लिए ओबरी चौखले के कलाल समाज ने एक अनुकरणीय पहल की है। समाज की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अब शादी-समारोहों और जन्मदिन की पार्टियों में 'केक' काटने की पाश्चात्य संस्कृति पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। साथ ही, सगाई की रस्म को भी सादगीपूर्ण बनाने के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं।

संरक्षक मोतीलाल गामड़ा की अध्यक्षता में हुई बैठक में समाज के संगठन को मजबूती देने और अनावश्यक खर्चों को कम करने पर मंथन हुआ। बैठक में तय किया गया कि सगाई के समय अब केवल एक नारियल (श्रीफल) और चांदी का सिक्का ही दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सगाई की रस्म को हल्दी वाले दिन ही संपन्न करने की सहमति बनी ताकि समय और धन दोनों की बचत हो सके। शादी के दौरान बनने वाले पकवानों (मीनू) की संख्या को भी सीमित किया गया है और सोने-चांदी के आभूषणों के चढ़ावे की अधिकतम सीमा निर्धारित करने पर विचार किया गया।

ब्यूटी पार्लर के खर्च पर रोक

सामाजिक सुधारों की कड़ी में समाज ने ब्यूटी पार्लर पर होने वाले बेतहाशा खर्च को बंद करने का आह्वान किया। साथ ही, समाज के महत्वपूर्ण निर्णयों और बैठकों में महिलाओं की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया, ताकि समाज की मुख्यधारा में उनका योगदान बढ़ सके।

विशेष कमेटियां और अनुशासन कमेटी बनाने का प्रस्ताव

नियमों का कड़ाई से पालन करवाने के लिए ग्राम स्तर पर विशेष कमेटियां और एक 'अनुशासन कमेटी' बनाने का प्रस्ताव रखा गया। बैठक में चौखला अध्यक्ष कन्हैयालाल कोलखंडा, संरक्षक भोगीलाल पाडवा, ओबरी अध्यक्ष मोहनलाल ओबरी बतौर अतिथि उपस्थित रहे।

इस दौरान भंवरलाल वरदा, तेजपाल वरदा, हीरालाल ओबरी, नटवरलाल ओबरी, प्रकाशचंद्र, दिलीप सागवाड़ा, शांतिलाल, प्रकाश वरदा, हंसमुखलाल, उमेश मांडव सहित ओबरी, वरदा, मांडव, गड़ा वेजनिया, गामड़ा, नौगामा और टामटिया के प्रतिनिधि मौजूद थे। संचालन शांतिलाल वरदा ने किया।

पूरे कलाल समाज के लिए बना मिसाल

यह निर्णय पूरे कलाल समाज के लिए एक मिसाल बनकर उभरा है। समाज के सदस्यों ने इसे हृदय से स्वीकार किया है और आशा व्यक्त की है कि अन्य समुदाय भी इस पहल से प्रेरणा लेकर अपनी सामाजिक कुरीतियों पर अंकुश लगाएंगे। इससे न केवल परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी बल्कि सादगीपूर्ण जीवनशैली को भी बढ़ावा मिलेगा।