
Rajasthan Monsoon : राजस्थान के डूंगरपुर के पूंजपुर में टिटहरी ने चार अंडे दिए, जिसका तीखा मुंह जमीन की ओर है इसलिए अच्छी बारिश की संभावना जताई जा रही है। चार अंडे दिए हैं ऐसे में मान्यता है कि क्षेत्र में 4 महीने अच्छी बारिश होगी। टिटहरी पक्षी आमतौर पर अप्रेल से जून (गर्मियों और मानसून की शुरुआत) के बीच अंडे देते हैं। यह समय उनके प्रजनन काल का होता है। टिटहरी के अंडों को लेकर भारत में कई पारंपरिक और ग्रामीण मान्यताएं जुड़ी हुई है। किसानों का मानना है कि टिटहरी जितने अंडे देती है, मानसून के दौरान उतने ही महीने बारिश होती है। आमतौर पर यह 2 से 4 अंडे देती है। पूंजपुर हनुमान मंदिर के पास स्थित खेतों में टिटहरी ने चार अंडे दिए।
पूंजपुर गांव के इस शुभ संकेत ने किसानों के चेहरे पर खुशी बिखेर दी है। स्थानीय परंपरा के अनुसार इसे अच्छी बारिश का संकेत माना जा रहा है। ग्रामीणों का विश्वास है कि इससे क्षेत्र में अगले चार महीने अच्छी बारिश होगी, जिससे खेतों में हरियाली छा जाएगी और फसलों को भरपूर पानी मिलेगा।
टिटहरी भारत की ग्रामीण संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है। इसे बारिश का दूत माना जाता है। अप्रैल से जून तक, यानी गर्मियों के चरम और मानसून की शुरुआत के बीच, यह पक्षी अपना प्रजनन काल पूरा करता है। इस दौरान मादा टिटहरी आमतौर पर 2 से 4 अंडे देती है। किसानों की सदियों पुरानी मान्यता है कि टिटहरी जितने अंडे देती है, मानसून उतने ही महीनों तक अच्छी बारिश देगा। चार अंडे मिलने पर चार महीने की अच्छी वर्षा की उम्मीद जागती है।
राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई गांवों में टिटहरी के अंडों को लेकर ऐसी मान्यताएं प्रचलित हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से टिटहरी पर्यावरण का संकेतक पक्षी है। यह सूखे इलाकों में भी रह सकती है, लेकिन इसके अंडे देने का समय और स्थान मानसून की तैयारी से जुड़ा होता है।
पूंजपुर के इस शुभ संकेत ने किसानों में नई उम्मीद जगा दी है। लंबे सूखे के बाद अगर चार महीने अच्छी बारिश हुई तो न केवल खरीफ की फसलें लहलहाएंगी, बल्कि जल संकट भी कम होगा। गांव के लोग अब प्रार्थना कर रहे हैं कि टिटहरी का यह संदेश सत्य साबित हो और धरती तर-बतर हो जाए। प्रकृति अपने तरीके से संकेत दे रही है।
वैसे मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण पश्चिमी मानसून के 26 मई को केरल तट से टकराने के बाद वह उत्तर भारत की ओर बढ़ेगा। भारतीय मौसम केन्द्र के अनुसार 20 जून को इसके राजस्थान के प्रवेश की संभावना है, यह सबसे पहले डूंगरपुर-बांसवाड़ा से टकरा सकता है इसके बाद 25 जून को झालावाड़ में प्रवेश करने के बाद पश्चिमी राजस्थान की ओर बढ़ेगा। 30 जून तक आधे राज्य में पूरी तरह छाने के बाद इसके 5 जुलाई तक पश्चिमी राजस्थान में पहुंचने की संभावना है। दो सौ एयर कंडीशनर हुए हैं।