
Hanging Bridge : डूंगरपुर-बांसवाड़ा जिलों के निवासियों के लिए खुशखबर। नाव का सफर अब इतिहास बन जाएगा। राजस्थान का दूसरा सबसे लंबा हैंगिंग ब्रिज डूंगरपुर-बांसवाड़ा को जोड़ेगा। पहला हैंगिंग ब्रिज कोटा में है। माही नदी पर डूंगरपुर जिले के चीखली और बांसवाड़ा जिले के आनंदपुरी को जोड़ने वाला गुरु गोविंद उच्च स्तरीय पुल (हैंगिंग ब्रिज) अब अपने अंतिम चरण में है। करीब 133.91 करोड़ की लागत से तैयार यह ब्रिज आगामी अगस्त माह में जनता के लिए खोला जा सकता है। इसके उद्घाटन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। हालांकि कार्यकारी एजेंसी को ठेकेदार फर्म की ओर से हस्तांतरण की प्रक्रिया बाकी है। ब्रिज की टेस्टिंग पूरी हो गई है और रिपोर्ट आने का इंतजार है।
प्रोजेक्ट के मुताबिक वर्ष 2020 में निर्माण पूर्ण होने की समय-सीमा तय की गई थी, लेकिन कोविडकाल, बजट अवरोध और तकनीकी कारणों से इसका निर्माण कार्य बार-बार अटकता गया। अब आखिरकार लोडिंग टेस्ट भी पूर्ण हो चुका है। लोक निर्माण विभाग के अनुसार रिपोर्ट आते ही ब्रिज विभाग को हस्तांतरित कर दिया जाएगा।
आनंदपुरी से वंडा डोकर की दूरी 5 किमी है, जबकि चीखली यहां से सिर्फ 9 किमी दूर है। लेकिन नदी के चलते यहां के ग्रामीणों को अब तक नाव से नदी पार कर चीखली पहुंचना पड़ता था, या फिर परतापुर, सागवाड़ा होकर करीब 108 किमी लंबा सफर करना पड़ता था। पुल के शुरू होते ही यह दूरी घटकर सिर्फ 9 किमी रह जाएगी।
भाजपा नेता सुशील कटारा ने सोमवार को अन्य पदाधिकारियों के साथ ब्रिज का अवलोकन किया। पीडब्ल्यूडी एक्सईएन दिनेश पंड्या व इंजीनियर संदीप चहल से चर्चा की। सुशील कटारा कटारा ने बताया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी को उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया गया है। उद्घाटन 15 अगस्त से पूर्व किए जाने की संभावना है।
1- हैंगिंग ब्रिज की लागत 134 करोड़ रुपए।
2- 1.925 किमी लम्बाई है पुल की।
3- ब्रिज की चौड़ाई 1 मी.।
4- 17 पिलर पर खड़ा है ब्रिज।
5- 823 मीटर का मुख्य स्पैन है।
6- मात्र 30 मिनट में डूंगरपुर-बांसवाड़ा का सफर होगा पूरा।
7- उन्नत तकनीक से किया जा रहा है निर्माण।
8- पुल पर भूकंप का कोई असर नहीं पड़ेगा।
9- जलस्तर बढ़ने पर पुल डैमेज होने की मिल जाएगी सूचना।
10- 9 साल करना पड़ा जनता को इंतजार।
1- हाई तकनीक से बन रहा पुल गुजरात और राजस्थान के बीच बढ़ा देगा कनेक्टिविटी।
2- पर्यटन की दृष्टि से रोजगार का साधन होगा उपलब्ध।
3- व्यापारिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा।