डूंगरपुर

Dungarpur Community Spirit Example : राजस्थान के ‘वागड़’ क्षेत्र में है हुण्डेला प्रथा का चलन, बिना मजदूरी लोग कटाते हैं फसलें

Dungarpur Community Spirit Example : राजस्थान के 'वागड़' क्षेत्र के आदिवासी समुदाय की एक प्राचीन सांस्कृतिक विरासत आज भी उनके लिए वरदान बनी हुई है। वागड़ की प्राचीन प्रथा, जहां बिना मजदूरी' फसलें कटती है, और साथ में लोकगीत गूंजते हैं। स्थानीय भाषा में इसे हुण्डेला प्रथा के नाम से पुकारते हैं।
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Rajasthan Vagad region prevalent Hundela tradition People harvest crops without wages
फसल निकालते ग्रामीण। फोटो पत्रिका

Dungarpur Community Spirit Example : जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में इन दिनों फसल कटाई और अनाज संग्रहण का कार्य जोरों पर है। खेतों में सोना लहलहा रहा है। कटाई के इस पीक सीजन में चहुंओर श्रमिकों की कमी हो गई है। जहां एक ओर देश के कई हिस्सों में किसान मजदूरी बढ़ने और श्रमिक न मिलने से परेशान हैं, वहीं राजस्थान के 'वागड़' क्षेत्र के आदिवासी समुदाय की एक प्राचीन सांस्कृतिक विरासत आज भी उनके लिए वरदान बनी हुई है।

दरअसल, आदिवासी समाज में प्राचीन काल से ही एक अनोखी परंपरा चली आ रही है, जिसे स्थानीय भाषा में हुण्डेला प्रथा कहा जाता है। हुण्डेला का अर्थ बिना किसी अर्थ के किसी कार्य को मिलकर पूरा करना हैं। यह एक ऐसी व्यवस्था है, जहां पूरा समुदाय एकजुट होकर एक-दूसरे के कार्यों को अपना समझकर निपटाता है। आज के इस दौर में जहा हर काम व्यावसायिक हो गया है, हुण्डेला प्रथा निस्वार्थ सेवा और सामुदायिक भावना की एक मिसाल पेश करती है। यह प्रथा न केवल बड़े से बड़े काम को बहुत ही आसानी से और बिना किसी आर्थिक खर्च के पूरा कर देती है, बल्कि समुदाय के बीच के बंधनों को भी मजबूत करती है।

ग्राम पंचायत रघुनाथपुरा के सुखलाल कोटडिया। फोटो पत्रिका

हर वर्ष मिलती है मदद - सुखलाल कोटडिया

ग्राम पंचायत रघुनाथपुरा के सुखलाल कोटडिया ने बताया कि हुंडेला प्रथा के तहत हमारे प्रतिवर्ष खेतीबाड़ी के सभी कार्य सम्पन्न होते हैं। इस वर्ष भी हुन्डेला के तहत गेहूं निकालने का कार्य किया गया। जिसमें सभी के सहयोग से करीब दस क्विंटल गेहूं की उपज प्राप्त हुई।

नया तालाब हथाई गांव के शिक्षक हेमेन्द्र ननोमा। फोटो पत्रिका

घंटों का काम मिनटों में - हेमेन्द्र ननोमा

नया तालाब हथाई गांव के शिक्षक हेमेन्द्र ननोमा ने कहा कि एक साथ एक ही काम में सभी के जुटने से घंटों का काम मिनटों में पूरा हो जाता है। किसान को आर्थिक के साथ ही मानसिक राहत मिल जाती है। इस वर्ष सभी भाइयों की सामूहिक 15 क्विंटल उपज प्राप्त हुई।

दरा हथाई गांव के सामाजिक कार्यकर्ता हीरालाल खराड़ी। फोटो पत्रिका

एकता की मिसाल - हीरालाल खराड़ी

दरा हथाई गांव के सामाजिक कार्यकर्ता हीरालाल खराड़ी ने बताया कि इस प्रथा के तहत आदिवासी समाज के लोगों के छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा काम आसानी से हो जाता है जिससे व्यक्ति पर ज्यादा आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ता है और सामाजिक एकता कायम रहती है। इस वर्ष भी हुंडेला प्रथा के तहत 6 क्विंटल गेहूं की उपज प्राप्त हुई है।

हुण्डेला : ऐसे मदद को आगे आते है...

जब भी किसी परिवार में बड़ा काम होता है, जैसे फसल की कटाई, मकान बनाना या कोई अन्य ऐसा कार्य जिसमें बहुत अधिक जनशक्ति की आवश्यकता हो, तो वह परिवार पूरे गांव या फले में 'हुण्डेला' का आह्वान करता है। फिर क्या है बड़े-बुजुर्ग, युवा, और सभी लोग अपने-अपने सामर्थ्य के अनुसार बिना किसी संकोच के जुट जाते हैं।

यह केवल काम नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और सहयोग का एक बड़ा उत्सव होता है। लोग बड़ी उत्सुकता और सहयोग की भावना से लोक गीतों को गाते हुए काम करते हैं, जिससे काम का बोझ और थकान कब खत्म हो जाती है, पता ही नहीं चलता।

Updated on:
05 Apr 2026 02:20 pm
Published on:
05 Apr 2026 02:11 pm