
डूंगरपुर। धंबोला क्षेत्र के लिखीबड़ी गांव में रविवार को एक ऐसा दर्दनाक मंजर देखने को मिला, जिसने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया। वात्रक नदी का गहरा पानी एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियों का काल बन गया। इस भीषण हादसे में नदी में डूबे चार बच्चों में से तीन स्थानीय निवासी बाबूलाल डामोर के थे। रविवार की सुबह इस परिवार के लिए आम दिनों जैसी ही सामान्य थी, लेकिन किसे पता था कि दोपहर होते-होते खुशियों का आंगन हमेशा के लिए सूना हो जाएगा और वहां मातम पसर जाएगा।
जैसे ही बाबूलाल डामोर को यह सूचना मिली कि उनके तीनों बच्चे पानी में डूब गए हैं, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वे इस असहनीय सदमे और मानसिक आघात को बर्दाश्त नहीं कर पाए और मौके पर ही बेसुध होकर गिर पड़े। परिजनों ने जब उन्हें इस बदहवास हालत में देखा, तो तुरंत डूंगरपुर के अस्पताल पहुंचाया। पिता की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने आपातकालीन वार्ड में उनका इलाज शुरू किया। अस्पताल के बेड पर अचेत पिता को देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की रूह कांप उठी और हर आंख नम हो गई।
जब पोस्टमार्टम के लिए चारों बच्चों के शव अस्पताल परिसर में लाए गए, तो वहां का माहौल अत्यंत गमगीन हो गया। अपने जिगर के टुकड़ों को खो चुकी महिलाओं और परिजनों के करुण विलाप से पूरा अस्पताल परिसर दहल उठा। बदहवास मां और अन्य रिश्तेदार बच्चों के बेजान शरीरों से लिपट-लिपटकर बिलख रहे थे। उनके बहते आंसुओं को थामने वाला वहां कोई नहीं था। जिसने भी इस दर्दनाक मंजर को देखा, उसका कलेजा मुंह को आ गया।
हादसे में काल का ग्रास बने चारों बच्चे बेहद होनहार थे और माता-पिता उन्हें उच्च शिक्षा दिलाकर उनके सुनहरे भविष्य की तैयारी में जुटे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। हादसे में काल का ग्रास बने चारों बच्चे होनहार थे और अपने सुनहरे भविष्य की तैयारी कर रहे थे। हीना डामोर अंग्रेजी साहित्य में एमए कर चुकी थी और आगे की प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी में जुटी थी। प्रतीक डामोर माता-पिता का इकलौता बेटा, जो 12वीं प्रथम श्रेणी उत्तीर्ण होने के बाद हाल ही में एसटीसी प्रवेश परीक्षा में 340 अंक लाकर शिक्षक बनने का सपना संजोए था। वहीं इशिता सबसे छोटी बेटी थी, जो 11वीं कक्षा में अध्ययनरत थी।
बता दें कि धंबोला थाना क्षेत्र के वात्रक नदी में नहाने गए चार भाई-बहनों की डूबने से मौत हो गई। मृतकों में तीन सगे भाई-बहन हैं, वहीं एक अन्य फुफेरी बहन थी। वहीं दो अन्य बच्चों को ग्रामीणों ने सुरक्षित बाहर निकाला, जिससे उनकी जान बच गई। जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह करीब 10 बजे वात्रक नदी एनीकट पर लिखीबड़ी निवासी बाबूलाल डामोर की बेटी इशिता (15 वर्ष), हीना (24 वर्ष), उनका बेटा प्रतीक (20 वर्ष), घर मेहमान आई रौनक (20 वर्ष) पुत्री गौतम परमार सहित 15 साल का राजवीर पुत्र कोहराम सिंह निवासी पालनपुर गुजरात एवं 11 साल का जयसिंह पुत्र सुरेश डामोर निवासी मेहसाणा गुजरात नहाने गए थे।
यहां नहाने के दौरान गहराई का सही अनुमान नहीं लग पाने के कारण वे गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए दो बच्चों राजवीर और जयसिंह को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन शेष चार इशिता, हीना, प्रतीक व रौनक को नहीं बचा पाए।