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क्या डूंगरपुर रेलवे स्टेशन का बदलेगा नाम? विधायक के लेटर के बाद सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

डूंगरपुर रेलवे स्टेशन के नामकरण को लेकर सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। विधायक और सांसद के पत्र के बाद एक पक्ष भील राजा डूंगर बरंडा के नाम की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा सरदार पटेल के पक्ष में है। मामला अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी ट्रेंड करने लगा है।
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Dungarpur Railway Station

Dungarpur Railway Station: डूंगरपुर रेलवे स्टेशन (फोटो-पत्रिका नेटवर्क)

डूंगरपुर। डूंगरपुर रेलवे स्टेशन के नामकरण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सोशल मीडिया तक पहुंच गया है। जनप्रतिनिधियों की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्रों के बाद यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर स्टेशन का नाम आदिवासी वीर भील राजा डूंगर बरंडा के नाम पर रखने की मांग हो रही है, तो दूसरी ओर कई लोग इसे सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम से जोड़ने की वकालत कर रहे हैं। दोनों पक्ष सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग हैशटैग के साथ अपनी-अपनी मुहिम चला रहे हैं, जिससे यह मामला अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है।

चौरासी विधानसभा क्षेत्र के विधायक अनिल कुमार कटारा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र भेजकर डूंगरपुर रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर 'भील राजा डूंगर बरंडा रेलवे स्टेशन' रखने की मांग की है। इसके साथ ही बांसवाड़ा क्षेत्र से सांसद राजकुमार रोत ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मांग का समर्थन किया है। दोनों जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और आदिवासी समाज की भावनाओं से जुड़ा विषय है।

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विधायक ने पत्र में क्या लिखा?

विधायक कटारा ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि भील राजा डूंगर बरंडा आदिवासी समाज के गौरव, स्वाभिमान और संघर्ष के प्रतीक रहे हैं। उनका मानना है कि रेलवे स्टेशन का नाम उनके नाम पर होने से स्थानीय इतिहास को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी और नई पीढ़ी अपने गौरवशाली अतीत से परिचित हो सकेगी। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि देशभर में कई सार्वजनिक संस्थानों का नाम महापुरुषों और स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में रखा गया है, इसलिए डूंगरपुर रेलवे स्टेशन के मामले में भी ऐसा कदम उठाया जाना चाहिए।

दूसरा पक्ष सरदार पटेल की कर रहा वकालत

वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है कि देश के एकीकरण में सरदार वल्लभभाई पटेल की ऐतिहासिक भूमिका रही है। उनका मानना है कि राष्ट्रीय एकता में उनके योगदान को देखते हुए रेलवे स्टेशन का नाम उनके सम्मान में रखा जाना अधिक उचित होगा। इस मांग को लेकर भी सोशल मीडिया पर लगातार पोस्ट और टिप्पणियां की जा रही हैं।

सोशल मीडिया पर बहस तेज

नामकरण को लेकर बहस अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी तेज हो चुकी है। X पर दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थन में अभियान चला रहे हैं और सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील कर रहे हैं। लगातार बढ़ रही ऑनलाइन चर्चा के कारण यह मुद्दा अब जिले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेशभर में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।

सरकार की तरफ से कोई निर्णय नहीं

फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। हालांकि जनप्रतिनिधियों के पत्र, सोशल मीडिया पर बढ़ती सक्रियता और दोनों पक्षों की दलीलों को देखते हुए माना जा रहा है कि डूंगरपुर रेलवे स्टेशन के नामकरण का मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा में रह सकता है। सरकार का अंतिम फैसला ही इस बहस पर विराम लगाएगा।