
Dungarpur: तीनों मृतक भाई-बहन (फोटो-पत्रिका)
डूंगरपुर। जिले के धंबोला क्षेत्र का लिखीबड़ी गांव रविवार को उस दर्द का गवाह बना, जिसे कोई कभी नहीं सहन कर सकता। जिस आंगन में कुछ घंटे पहले तक बच्चों की हंसी गूंज रही थी, वहीं शाम होते-होते तीन भाई-बहनों की अर्थियां एक साथ उठीं। इस हृदयविदारक दृश्य ने पूरे गांव को झकझोर दिया। जिसने भी यह मंजर देखा, उसकी आंखें नम हो गईं। बच्चों के पिता बाबूलाल डामोर अपने जिगर के टुकड़ों को खोने का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सके। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जबकि उन्हें सांत्वना देने पहुंचे लोग भी खुद आंसू नहीं रोक पाए।
रविवार सुबह करीब 10 बजे बाबूलाल डामोर की तीनों बच्चे- 24 वर्षीय हीना डामोर, 20 वर्षीय प्रतीक डामोर और 15 वर्षीय इशिता डामोर अपने रिश्तेदारों के साथ वात्रक नदी के एनीकट पर नहाने गए थे। उनके साथ गुजरात से आई उनकी फुफेरी बहन रौनक (20) पुत्री गौतम परमार भी थी। इसके अलावा पालनपुर निवासी राजवीर (15) और मेहसाणा निवासी जयसिंह (11) भी उनके साथ मौजूद थे।
नहाने के दौरान बच्चों को नदी की गहराई का अंदाजा नहीं लगा और देखते ही देखते सभी बच्चे गहरे पानी में डूबने लगे। चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण दौड़े और साहस दिखाते हुए राजवीर और जयसिंह को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन हीना, प्रतीक, इशिता और रौनक को नहीं बचाया जा सका। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा तथा चारों शवों को सीमलवाड़ा अस्पताल की मोर्चरी पहुंचाया गया।
पोस्टमार्टम के बाद रविवार शाम तीनों भाई-बहनों के शव लिखीबड़ी गांव पहुंचे तो पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई। मां अपने बच्चों के शवों से लिपटकर बिलखती रही, जबकि रिश्तेदार और ग्रामीण उसे संभालने की कोशिश करते रहे। हर आंख नम थी और हर चेहरा गम में डूबा हुआ था। देर शाम गांव के श्मशान घाट पर हीना, प्रतीक और इशिता का अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं गुजरात निवासी रौनक का शव पोस्टमार्टम के बाद उसके परिजन अपने साथ अंतिम संस्कार के लिए लेकर रवाना हो गए।
इस हादसे ने एक परिवार के सारे सपने पलभर में छीन लिए। सबसे बड़ी बेटी हीना डामोर अंग्रेजी साहित्य में एमए कर चुकी थी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द सरकारी नौकरी हासिल करेगी। प्रतीक डामोर, जो परिवार का इकलौता बेटा था, हाल ही में 12वीं प्रथम श्रेणी से पास हुआ था। उसने एसटीसी प्रवेश परीक्षा में 340 अंक हासिल किए थे और शिक्षक बनने का सपना देख रहा था। सबसे छोटी बेटी इशिता 11वीं कक्षा की छात्रा थी और पढ़ाई में बेहद होनहार थी।
बच्चों की मौत की खबर मिलते ही पिता बाबूलाल डामोर सदमे से बेसुध होकर गिर पड़े। उनकी हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका उपचार जारी है। अस्पताल में उन्हें देखकर वहां मौजूद लोगों की भी आंखें भर आईं।
घटना की सूचना मिलते ही पूर्व सांसद ताराचंद भागोरा, धंबोला थानाधिकारी देवेंद्र देवल, एसआई अशोक मीणा, एएसआई सोहनलाल मीणा, तहसीलदार राजेश मीणा सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिए। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे चौरासी विधानसभा क्षेत्र में शोक की लहर है और गांव में हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात है- भगवान किसी को ऐसा दुख नहीं दे।
Updated on:
12 Jul 2026 08:13 pm
Published on:
12 Jul 2026 08:07 pm
