
BJP Worker: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता और सांसद विजय बघेल के समर्थक तारेंद्र बंछोर की आत्महत्या ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। उतई थाना क्षेत्र के ग्राम सेलूद में मंगलवार सुबह उनका शव एक शिव मंदिर परिसर में फांसी के फंदे पर लटका मिला। सबसे भावुक और चौंकाने वाली बात यह है कि जिस शिव मंदिर में उनका शव मिला, उसका निर्माण करीब 20 साल पहले उन्होंने स्वयं उपसरपंच रहते हुए कराया था।
परिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक, घटना से एक दिन पहले तक तारेंद्र पूरी तरह सामान्य नजर आ रहे थे। वे गांव के एक बर्सी कार्यक्रम में भी शामिल हुए थे और लोगों से सामान्य तरीके से बातचीत कर रहे थे। किसी को भी अंदाजा नहीं था कि वे इतना बड़ा कदम उठाने वाले हैं।
जानकारी के अनुसार, तारेंद्र बंछोर ने आत्महत्या से एक दिन पहले स्थानीय हार्डवेयर दुकान से रस्सी खरीदी थी। इतना ही नहीं, फांसी लगाने से पहले उन्होंने अपना मोबाइल फोन भी अनलॉक कर दिया था, ताकि उनके परिवार वालों को फोन खोलने या जरूरी जानकारी हासिल करने में किसी तरह की परेशानी न हो। उनके इस कदम ने ग्रामीणों और परिजनों को हैरान कर दिया है। लोग इसे मौत से पहले की सोची-समझी तैयारी मान रहे हैं। हालांकि पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, जिसके चलते आत्महत्या के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है।
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2005 में तारेंद्र बंछोर ग्राम सेलूद के उपसरपंच चुने गए थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बाजार चौक स्थित चारबांधा तालाब के पास शिव मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर के आसपास विकास कार्यों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। बताया जा रहा है कि जिस चंपा के पेड़ पर उनका शव लटका मिला, वह पेड़ भी वर्षों पहले उन्होंने स्वयं लगाया था। यही वजह है कि उनकी मौत ने गांव के लोगों को भावुक कर दिया है। जिस स्थान को उन्होंने अपनी मेहनत और आस्था से विकसित किया, वही उनकी जिंदगी का अंतिम पड़ाव बन गया।
मंगलवार सुबह मंदिर परिसर पहुंचे ग्रामीणों ने सबसे पहले पेड़ से लटका शव देखा। इसके बाद तत्काल उतई थाना पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है और बड़ी संख्या में लोग परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।
परिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक, तारेंद्र बंछोर पिछले कुछ समय से पेट से जुड़ी बीमारी से जूझ रहे थे। हाल ही में उनकी तबीयत अधिक खराब होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती भी कराया गया था। इलाज के दौरान उन्हें निमोनिया होने की भी जानकारी सामने आई थी। हालांकि उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ था और वे घर लौट आए थे। इसके बावजूद वे मानसिक रूप से किस स्थिति में थे, इसे लेकर अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
तारेंद्र बंछोर गांव में सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े हुए थे। वे भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता माने जाते थे और सांसद विजय बघेल के समर्थकों में उनकी पहचान थी। वर्तमान में वे सेलूद स्थित शासकीय कन्या विद्यालय समिति के अध्यक्ष और सरस्वती शिशु मंदिर समिति के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रहे थे। घटना की जानकारी मिलने के बाद सांसद विजय बघेल भी ग्राम सेलूद पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की।
उतई थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस परिजनों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों से पूछताछ कर रही है। साथ ही मोबाइल फोन और अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है, ताकि आत्महत्या के पीछे के कारणों का पता लगाया जा सके। फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। वहीं, गांव में हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय रहने वाले तारेंद्र बंछोर ने अपनी जिंदगी खत्म करने जैसा कदम उठा लिया।