आईजी जीपी सिंह ने एसपी और विवेचना अधिकारियों की शनिवार को हुई बैठक में प्रकरणों के निराकरण के लिए 10 दिनों की मोहलत दी है। लापरवाही पर विवेचना अधिकारी और टीआई के खिलाफ सीधी कार्रवाई की जाएगी।
दुर्ग. जनता का करोड़ों रुपए डकारने वाली चिटफंड कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश आईजी जीपी सिंह ने दिए हैं। उन्हें ऐसी फर्जी कंपनियों एवं उनके फरार डायरेक्टरों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने समयसीमा भी निर्धारित की है। उन्होंने एसपी और विवेचना अधिकारियों की शनिवार को हुई बैठक में प्रकरणों के निराकरण के लिए 10 दिनों की मोहलत दी है। लापरवाही पर विवेचना अधिकारी और टीआई के खिलाफ सीधी कार्रवाई की जाएगी।
निवेशकों से अरबों रुपए की ठगी
बता दें कि पूरे संभाग में चिटफंड कंपनियों ने कम समय में अधिक मुनाफा देने का लालच देकर अरबों रुपए निवेश कराया गया था। जब राशि देने की बारी आई तो अधिकतर कंपनियां कारोबार समेट कर नौ-दो ग्यारह हो गई। ठगे जाने के बाद लोग थाने तक पहुंचे थे। आईजी ने इस तरह की शिकायतों का निराकरण 10 दिनों के भीतर करने की चेतावनी दी है। निर्धारित समय पर शिकायतों का निराकरण नहीं होने पर उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि कार्रवाई के लिए तैयार रहे। इसके लिए वे संबंधित सीएसपी से लेकर विवेचना अधिकारी को दोषी मानेंगे। बैठक में एसपी दुर्ग, राजनांदगांव, कबीरधाम के विवेचक शामिल थे।
समस्त गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की सूची तैयार
आईजी ने कहा है कि जिले के अंतर्गंत संचालित समस्त गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की सूची तैयार कर निदेशक मण्डल की जानकारी एकत्र करें। कंपनी की मान्यता, कार्यक्षेत्र, पंजीकृत व उद्देश्यों पर नजर रखे। पुलिस रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड, एवं राष्ट्रीय आवास बैंक से विस्तृत जानकारी ली जाए। कंपनी के अधिकारी व कर्मचारियों का संपूर्ण विवरण रखा जाए। बंद हो चुकी फ्राड कंपनियों की संपत्ति का ब्यौरा हासिल कर सीज कार्यवाही करंे।
प्रकरणों को निपटाने दिए सुझाव
१. लाइन-ऑफ-इन्वेस्टिगेशन तय करें। प्रकरण को लेकर सीएसपी, टीआई विवेचना अधिकारी एकसाथ चर्चा कर निष्कर्ष निकाले।
२. चिटफण्ड कंपनियों के फरार आरोपियों के विरूद्ध तत्काल लुक-ऑउट एवं रेड-कॉर्नर नोटिस जारी किया जाए।
३. फरार आरोपियों को पकडने के लिए इनाम की घोषणा की जाए।
४. पहले से जेल में निरुद्ध आरोपी को गिरफ्तार करने अन्य जिले की पुलिस से संपर्क करे।
५. राज्य के बाहर घूम रहे आरोपियों को पकडने के लिए जिला स्तर पर टीम गठित करे।