Shri krishna janmastami: वृंदावन के प्रसिद्ध भजन गायक जतिन अग्रवाल द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी इसके साथ ही पंजरी का प्रसाद बंटेगा। आयोजन समिति ने जन्माष्टमी उत्सव में शामिल होने की अपील की है।
Shri krishna janmotsav: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव के लिए प्रसिद्ध राधाकृष्ण मंदिर महेश कॉलोनी में नवधा पारायण रामायण पाठ करने भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। यहां आयोजन के पांचवें दिन 3 हजार से अधिक भक्तों ने सामूहिक रूप से रामायण पाठ किया। वहीं दूसरी ओर विष्णु महायज्ञ में लोक कल्याण के लिए मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां समर्पित किया।
महेश नगर के राधाकृष्ण मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव सोमवार को सुबह 6 बजे से मध्यरात्रि तक मनेगा। इसमें सुबह 6 बजे प्रभातफेरी, 7 बजे से मंगलाआरती, 8.30 बजे से महाभिषेक, 9.30 बजे से ध्वजारोहण, 11.30 बजे से छप्पन भोग, शाम 5 बजे से रास गरबा और रात 12 बजे भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। रात 8.30 बजे से वृंदावन के प्रसिद्ध भजन गायक जतिन अग्रवाल द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी। पंजरी का प्रसाद बंटेगा। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने अधिक से अधिक भक्तों को जन्माष्टमी उत्सव में शामिल होने की अपील की है।
इधर रविवार को जोधपुर के पं. गोपाल आसोपा और पं. सुशील आसोपा ने श्रद्धालुओं को नवधा रामायण का सामूहिक पाठ करवाने के साथ ही भगवान राम का भारद्वाज वाल्मिकी संवाद, भगवान का चित्रकूट निवास, दशरथजी का देवलोक गमन और भरतजी के चित्रकूट प्रस्थान के प्रसंग पर संगीतमय सार भी बताया। आखिर में रामायणजी की आरती की गई।
93 साल पुराना है राधा-वल्लभ मंदिर का इतिहास, जन्माष्टमी पर उमड़ेगी
भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव सोमवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके लिए मंदिरों में तैयारियां लगभग पूर्ण कर ली गई हंै। मंदिरों को आकर्षक तरीके से सजाया जा रहा है। अंबिकापुर में सबसे प्राचीन राधा-वल्लभ मंदिर में भी तैयारी चल रही है। यह मंदिर 93 वर्ष पुराना है। मंदिर का निर्माण राज परिवार द्वारा वर्ष 1931 में कराया गया था। यहां पढ़ें पूरी खबर
कृष्ण जन्माष्टमी पर बन रहा है द्वापरकालीन योग
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को बाल कृष्ण की जन्मोत्सव के रूप में पूजन किया जाता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार इस वर्ष विशेष फलदायक होने वाला है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस साल 26 अगस्त को मनाए जाने वाले कृष्ण जन्माष्टमी पर दशकों बाद द्वापरकालीन शुभ संयोग का निर्माण हो रहा है। यहां पढ़ें पूरी खबर