इंकम टैक्स डिपार्टमेंट के 3 सीनियर ऑफिसर्स को force मामले में सस्पेंड कर दिया गया है। इन अधिकारियों से 15 दिन में सफाई मांगी गई है।
नई दिल्ली: आयकर विभाग ने इंडियन रेवेन्यू सर्विस एसोसिएशन की ओर से सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस को FORCE यानी Fiscal Option and Response to the Covid-19 Epidemic रिपोर्ट को लीक करने के मामले में 3 सीनियर IRS ऑफिसर्स को सस्पेंड कर दिया गया है। सोमवार को आयकर विभाग के 50 अधिकारियों पर अपनी मनमर्जी से रिपोर्ट को ट्विटर पर शेयर करने की बात को सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन ठहराते हुए जांच बिठाई गई थी। आपको बता दें कि FORCE नाम की इस रिपोर्ट में सुपर रिच लोगों पर 40 फीसदी टैक्स के साथ सेस और सरचार्ज लगाने की सिफारिश की गई थी, जिसे सरकार ने खारिज कर दिया था। इस रिपोर्ट के लीक हो जाने पर सरकार ने ये कहते हुए पल्ला झाड़ा था कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने IRS Association या उसके अधिकारियों को इस तरह की रिपोर्ट तैयार करने के लिए कभी कहा ही नहीं था। सस्पेंड अधिकारियो में प्रिंसिपल कमिश्नर रैंक के ऑफिसर भी शामिल हैं।
किस आधार पर हुए सस्पेंड- CBDT के एक अधिकारी ने पहचान न बताने की शर्त पर बताया कि 30 साल से ज्यादा का अनुभव होने के बावजूद नियमों की अनदेखी की है। सस्पेंड हुए तीन ऑफिसर में 1988 बैच के प्रशांत भूषण पर रिपोर्ट को पब्लिक डोमेन में शेयर करने का आरोप है। जबकि प्रकाश दुबे और संजय बहादुर पर जूनियर्स को रिपोर्ट बनाने का आदेश देने का आरोप लगा है।
माना जा रहा है कि इन 3 ऑफिसर्स ने 50 अन्य ऑफिसर्स को पथभ्रमित किया। इस रिपोर्ट के लीक होने की वजह से कोरोना की वजह से पहले से ही तनावपूर्ण आर्थिक हालात को बढ़ाने का काम किया है। यही वजह है कि इन तीनों ऑफिसर्स को सस्पेंड करने का फैसला किया गया है।
FORCE रिपोर्ट में क्या कहा गया था – इस रिपोर्ट में सिर्फ ईमानदार टैक्सपेयर्स को राहत देने की बात कहते हुए 1 करोड़ से ज्यादा इनकम वालों पर 30 की जगह 40 फीसदी टैक्स लगाने की सिफारिश की गई थी। इन अधिकारियों का मानना था कि इससे सरकार को 2700 करोड़ रुपए की कमाई होगी । वहीं 30 जून 2021 तक मौजूदा महंगाई भत्ते को न बढ़ाने की सलाह दी गई थी और दावा किया गया है कि इससे सरकार को 37 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी। इसके अलावा इस रिपोर्ट में विदेशी कंपनियों पर 9 से 12 महीनों के लिए सरचार्ज बढ़ाने की बात भी कही गई । फाइनेंस कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर 'कोविड रिलीफ सेस' वसूलने का सुझाव देते हुए इससे सरकार को 15 से 18 हजार करोड़ रुपए की कमाई का दावा किया गया है।