सरकार के इस फैसले से केन्द्रीय व डीम्ड विश्वविद्यालय के करीब 25,000 मौजूदा पेंशनर्स का फायदा होगा।
नर्इ दिल्ली। सरकार ने केन्द्रीय अौर राजकीय विश्वविद्यालय के 8 लाख शिक्षण और अन्य समकक्ष शैक्षणिक कर्मचारियों को मिलने वाले पेंशन लिमिट में एक बार फिर से संशोधन किया है। केन्द्र सरकार ने ये बदलाव 7वें पे-कमीशन के अंतर्गत किया है। इस फैसले से करीब 25,000 मैजूदा पेंशनधारकाें को फायदा मिलने वाला है। इसके साथ की करीब 8 लाख शिक्षण और 15 लाख अन्य समकक्ष शैक्षणिक कर्मचारियों को फायदा मिलने वाला है। इसके बारे में मानव संशाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्विट करके जानकारी दी। आइए जानते हैं इसके बारे में कुछ खास बातें।
यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के एक सचिव के मुताबिक, "यह आदेश केवल उन मामलों में लागू है जहां ऐसी पेंशन योजनाएं पहले से ही भारत सरकार / मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) के पूर्व अनुमोदन के साथ अपनाई गई हैं। विश्वविद्यालय / कॉलेज ने पेंशन को अलग तरीके से तय किया है। उपर्युक्त फॉर्मूलेशन को संबंधित विश्वविद्यालय / कॉलेजों द्वारा पुन: कार्य करना पड़ सकता है और आवश्यक समायोजन किया जाना चाहिए।
क्या हैं खास बातें
लगभग 25,000 वर्तमान पेंशनभोगियों को केंद्रीय विश्वविद्यालयों और यूजीसी में लाभ मिलेगा। ये लाभ उन्हें 6,000 रुपए से लेकर 18,000 रुपए तक का मिलेगा। पिछले साल, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यूजीसी के अधिकार और केंद्रीय वित्त पोषित तकनीकी संस्थानों के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों में लगभग 8 लाख शिक्षण और अन्य समकक्ष शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए वेतनमानों के संशोधन के लिए अपनी मंजूरी दे दी थी। इस वेतन संशोधन के कार्यान्वयन से शिक्षकों के वेतन में रुपये की सीमा में वृद्धि होगी। 10,400 और रु। सरकार ने कहा था कि 49,800। इससे पहले, एक सरकारी आदेश में कहा गया था कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को छुट्टी यात्रा छूट (एलटीसी) पर दैनिक भत्ता नहीं मिलेगा। बता दें कि 7वें वेतन आयागे की सिफारिशें जनवरी 2017 से प्रभावी हैं।