किसानों को Minimum support price से ज्यादा की अपेक्षा Dairy Products का मूल्‍य सुनिश्चित करे मोदी सरकार FM Nirmala Sitharman को उठाने होंगे ठोस कदम
नई दिल्ली। पांच साल पहला कार्यकाल पूरा करने के बाद मोदी सरकार ( Modi government ) दोबारा पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई है। हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव के दौरान खेती और किसानी बड़ा मुद्दा था। भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में किसानों के बड़े-बड़े वादे भी किए। इसलिए देश के किसानों का मसला इस बार सिर्फ फसल लागत ( Crops Price) दोगुना करने से ज्यादा व्यापक हो गया है। देश के किसानों को सरकार से ठोस कदमों की अपेक्षा है।
दरअसल, मसला ये है कि कृषि के लिए पिछले पांच साल में कई वादे किए जा चुके हैं। इसलिए इस बार मसला सिर्फ किसानों को फसल की लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य ( minimum support price ) मिलना या अगले तीन साल में आमदनी दोगुनी करना भर नहीं है। यह मसला अब काफी आगे निकल चुका है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ( Finance Minister Nirmala Sitharman) पर इस बार किसानों की इन अपेक्षाओं पर ध्यान देने का भी दबाव है।
क्या है किसानों की सरकार से अपेक्षा
कृषि उपकरणों की खरीद पर मिले सब्सिडी
किसानों के लिए ट्रैक्टर और सिंचाई के पंप अब जरूरी उपकरण हो गए हैं। उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मांग की है कि इन जरूरी उपकरणों की खरीद पर किसानों को ब्याज में सब्सिडी देने की व्यवस्था की जाए। अगर ट्रैक्टर और सिंचाई पंप जैसे उपकरणों को कर मुक्त कर दिया जाय तो इससे किसानों को बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।
टैक्स का बोझ कम होने से इन उपकरणों की कीमत में कमी आएगी। इसके साथ ही किसानों को कृषि उपकरण खरीदने के लिए ब्याज मुक्त कर्ज दिया जाना चाहिए। इससे किसानों में कृषि उपकरण खरीदने को प्रोत्साहन मिलेगा और कृषि उपज बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
डेयरी उत्पादों के भाव
भारत में अधिकतर किसान खेती के साथ पशुपालन का काम भी करते हैं। यह वास्तव में कृषि से जुड़ा पेशा है जिसकी वजह से किसान इसमें खासी रुचि लेते हैं। डेयरी उत्पादों का बाजार भाव और किसानों को मिलने वाली कीमत में कोई संबंध नहीं होने की वजह से पशुपालकों को दिक्कत होती है। पशुओं के चारे के भाव लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि उनके उपज के भाव में मामूली वृद्धि होती है।
इसलिए किसानों की सरकार से अपेक्षा है कि पशु चारे के भाव पर नियंत्रण करने की पहल करनी चाहिए। इसके साथ ही पशुपालकों के उत्पाद और उपज के लिए बाजार भाव आधारित सिस्टम पर जोर देना चाहिए।
अवैध व्यापार पर भारी दंड
हर मौसम में कृषि उपज आने के साथ ही सप्लाई चेन में दलाल सक्रिय हो जाते हैं। इस वजह से किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पाता है। बिचौलिए वास्तव में किसान की मजबूरी का फायदा उठाते हैं और किसान से उनकी फसल औने-पौने दाम पर खरीद लेते हैं। यह सिलसिला पहले की तरह आज भी जारी है।
इसलिए देश के किसानों की मांग है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर कृषि उपज खरीदना दंडनीय अपराध बनाया जाए। इससे किसानों को काफी राहत मिलेगी। इस तरह के कदम से किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
जल संरक्षण को मनरेगा से जोड़ने पर बल
बदलते दौर के हिसाब से किसानों की मांग है कि जल संरक्षण से जुडी गतिविधियों को मनरेगा के तहत लाकर इसका प्रभावी हल निकाला जा सकता है। जल संरक्षण से जुड़े प्रोजेक्ट को मनरेगा से जोड़ने से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को समय से पूरा करने में भी मदद मिलेगी।
एग्रो प्रोसेसिंग प्लांट
मोदी सरकार ने चुनाव के दौरान 50 से 100 गांव का क्लस्टर बनाकर वहां एग्रो-प्रोसेसिंग प्लांट लगाने और उनके कर्ज माफ करने का वादा किया था। किसानों का कहना है कि सरकार वादों के अनुरूप एग्रो प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित कर फसल की आसान पहुंच मंडी तक सुनिश्चित करे और न्यूनतम समर्थन मूल्य ( minimum support price ) के मुताबिक किसानों को उचित कीमत दिलाने के लिए जरूरी तंत्र भी सुनिश्चित करे।