
नर्इ दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवार्इ वाली एनडीए सरकार ने कर्इ बार इस बात का आश्वासन दिया है चुनावी साल हेने के बाद भी वित्त वर्ष 2018-19 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3.3 फीसदी की लक्ष्य तक टिका रहेगा। हालांकि, मूडीज के बाद अब इंडिया रेटिंग्स ने कहा है कि मुख्य रूप से राजस्व में कमी के कारण भारत इस लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाएगा।
इंडिया रेटिंग्स ने क्या कहा
इससे पहले, रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा था कि अक्टूबर में पेट्रोल व डीजल पर 1.5 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की वजह से राजकोषीय स्लीपेज को 0.1 फीसदी से बढ़कर 3.4 फीसदी पहुंच जाएगा। अब इंडिया रेटिंग एजेंसी इसे लागतार तीसरे साल भी 3.5 फीसदी रहने की उम्मीद कर रही है। इंडिया रेटिंग्स ने कहा, "यह लगातार तीसरा साल होगा कि राजकोषीय अंतर 3.5 फीसदी होगी।" वित्त वर्ष 19 में केंद्र सरकार के राजकोषीय घाटे में 39,900 करोड़ रुपए की गिरावट की संभावना है। रेटिंग एजेंसी ने इस रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 1999 में 6,64,000 करोड़ रुपए के मुकाबले 6,64,000d करोड़ रुपए रहने का अनुमान है।
विनिवेश लक्ष्य पूरा करने में भी परेशानी
यह भी कहा गया है कि राजकोषीय स्लीपेज मुख्यतः अप्रत्यक्ष टैक्सेज व नाॅन-टैक्स रेवेन्यू में कमी की वजह से है। इंडिया रेटिंग्स ने कहा कि संभवतः सरकार को टैक्स रेवेन्यू में 22,400 करोड़ रुपए की कमी हो सकती है। जबकि नाॅन-टैक्स रेवेन्यू में भी 16,000 करोड़ रुपए की कमी रहेगी। साथ ही, सरकार विनिवेश लक्ष्य को भी पूरा करने में नाकाम रह सकती है। जो कि बजट टार्गेट के 80,000 करोड़ के मुकाबले 15,247 करोड़ कम है। वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में सरकार ने अनुमानित खर्च में 70,000 करोड़ रुपए कम है।