कुछ दिनों पहले ही मोदी सरकार ने जन औषधि केंद्र खोलकर मंहगी- मंहगी दवाईयों को सस्ता कर दिया था और ये फैसला भी किया था कि 20-30 प्रतिशत और जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे।
नई दिल्ली। कुछ दिनों पहले ही मोदी सरकार ने जन औषधि केंद्र खोलकर मंहगी- मंहगी दवाईयों को सस्ता कर दिया था और ये फैसला भी किया था कि 20-30 प्रतिशत और जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे। लेकिन सरकार और फार्मा सेक्टर को एक बड़ा झटका लगने जा रहा है। दरअसल हर दिन होते पर्यावरण के नुकसान के चलते चाइनीज कंपनियों पर ताला लटकाया जा रहा है। क्योंकि सबसे ज्यादा प्रदूषण करने वाली कंपनीयों में चाइनीज कंपनियों का नाम सबसे ऊपर आता है। चाइनीज कंपनियों पर ताला लटकने की वजह से भारत के लिये बुरी खबर है। क्योंकि इससे भारत में दवाओं की आपूर्ति पर असर पड़ेगा और कीमतें तेजी से बढ़ जायेगी।
दवाओं के लिए चीन पर क्यो निर्भर है ?
सिर्फ साल 2017में ही चीन की तकरीबन 1.5 लाख फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं। जिसके कारण भारत में दवाओं के निर्माण के लिए आने वाले 85 पर्सेंट एक्टिव फार्मासूटिकल इन्ग्रीडियेंट (एपीआई) की कीमतें 120 फिसदी बढ़ा गई है। जून 2017 की तुलना में ऐंटी डायबीटीक, कार्डोवस्कुलर, सेंट्रल नर्वस सिस्टम, विटामिंस और ऐंटीबायॉटिक्स सहित लगभग सभी तरह की दवाएं के लिए कच्चे माल महंगे हो गए हैं। सबसे अधिक वृद्धि कैंसर से संबंधित दवाओं में हुई है। कैंसर की दवाओं के लिए अहम एपीआई, 5-फ्लूरोसाइटोसिन और एचएमडीएस में क्रमश: 60 और 484 फीसदी की वृद्धि हुई है।
छोटे सप्लायर्स ने बंद किया करोबार
फार्मासूटिकल की बढ़ती किमतों के कारण छोटे सप्लायर्स करोबार को बंद करने की सोच रहे है। छोटे सप्लायर्स का कहना है की वो इतने मंहगे दामों पर फार्मासूटिकल नहीं खरीद पायेगे। फार्मासूटिकल की बढ़ती किमतों के कारण कई छोटे -छोटे सप्लायर्स ने तो करोबार बंद तक कर दिया। अगर ऐसा ही चलता रहा तो सरकार के लिये दवाओं की पूर्ती कर पानी संभव नहीं है। क्योंकि भारत पिछले कुछ दशकों से भारतीय फार्मासूटिकल इंडस्ट्री एपीआई और दूसरे अहम सामग्रियों के लिए चीन पर निर्भर है।