कम खपत और मांग में कमी की वजह से भारत के ग्रोथ अनुमान को किया कम फिच और इंडिया रेटिंग्स ने मौजूदा एवं 2021 वित्त वर्ष के ग्रोथ अनुमान को किया कम
नई दिल्ली। मौजूदा समय में कोरोना वायरस की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन की स्थिति है। पीएम की घोषणा के अनुसार अभी यही स्थिति दो और हफ्ते तक रहने वाली है। जिसकी वजह से देश की इकोनॉमी पर काफी असर देखने को मिल रहा है। इसलिए भारत की रेटिंग एजेंसी और विदेशी एजेंसी फिच की ओर से भारत की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को कम किया है। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर दोनों की ओर से देश की इकोनॉमिक ग्रोथ का क्या अनुमान लगाया है।
फिच ने घटाया अनुमान
फिच सोल्यूशंस के अनुमान के अनुसार अगले वित्त वर्ष 2020-21 के लिए भारत की जीडीपी के अनुमान को कम करते हुए 5.4 फीसदी से 4.6 फीसदी कर दिया है। कारोना वायरस की वजह से निजी खपत कमजोर होने और निवेश में कमी के कारण एजेंसी की ओर से यह अनुमान कम करना पड़ा है। वहीं फिच ने चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान अनुमान को 4.9 फीसदी किया हुआ है। फिच सोल्यूशंस के अनुसार बीते सप्ताह 1.7 लाख करोड़ रुपए के पैकेज के बाद भी आने वाले महीनों में खपत में इजाफा होने की संभावना कम ही दिखाई दे रही है।
इंडिया रेटिंग्स की ओर से भी कमजोर अनुमान
वहीं दूसरी ओर घरेलू रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स ने भी देश की जीडीपी को लेकर चिंता जाहिर की है। एजेंसी के अनुसार कोरोना वायरस की वजह से वित्त वर्ष 2020-21 के लिए देश की जीडीपी दर अनुमान को कम कर 3.6 फीसदी कर दिया गया है। एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार जून तिमाही में वृद्धि दर 2.3 फीसदी ही रहने की आशंका है। वहीं चालू वित्त वर्ष की मार्च तिमाही में यह 4.7 फीसदी का अनुमान लगाया गया है। एजेंसी ने अनुमान का कारण बताते हुए कहा कि कोरोना वायरस का स्पष्ट प्रभाव चुनिंदा मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर्स में प्रोडक्शन बाधित होने के रूप दिख रहा है।