
नई दिल्ली। बारिश का इंतजार कौन नहीं करता हम सभी को बारिश का बेसब्री से इंतजार रहता हैं। लेकिन इस बार सिर्फ लोग बारिश का इंतजार ही करते रह गए। इस बार मॉनसून आया तो लेकिन बहुत ही देरी से। इस बार मॉनसून सीजन में सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश हुई है। कम बारिश होने के कारण इस बार फसलों की बुआई में कमी आई है और इससे पैदावार घटने की आशंका बढ़ी है। तेज धूप रहने के कारण कई फसलों को काफी नुकसान पहुंचा हैं। ऐसे में मॉनसून के देरी से आने और बारिश के कम पड़ने से मंहगाई के बढ़ने की आंशका बढ़ती जा रही हैं। आम जनता पहले ही पे की बढ़ती कीमतों का बोझ झेल रही हैं। ऐसे में सब्जियों के दाम बढ़ने से आम जनता पर मंहगाई की मार पड़ने वाली है।
कम हो सकती है बारिश
देश के 82 पर्सेंट इलाकों में मॉनसून सीजन के बाद से सामान्य बारिश दर्ज की गई है, इसके बावजूद यह कमी दर्ज की गई है। आमतौर पर मॉनसून सीजन जून से शुरू होकर सितंबर तक रहता है। लेकिन कई एजेंसियों का कहना है की इस बार मॉनसून देरी से आया है और जल्दी ही चला भी जाएगा। इस सीजन में मॉनसून अनियमित रहा है।एजेंसियों ने इस महीने में भी कम बारिश होने का अनुमान जताया है।
फसलों पर पड़ा बुरा असर
बारिश में कमी से ग्रीष्मकालीन फसलों की बुआई पर काफी बुरा असर पड़ा हैं। बारिश से सबसे ज्यादा अगर कोई फसल प्रभावित हुई है तो वो है चावल और दाल। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले इस साल चावल और दाल की बुआई में 4 पर्सेंट की कमी आई है। अगर ऐसा ही रहा तो जल्द ही सब्जियों समेत चवाल-दाल के दामों में भी बढ़ोतरी देखी जाएगी। इतना ही नई एजेंसियों का कहना ये भी है की अगर अभी से भी सभी इलाकों में अच्छी बारिश होती है, तभी भी तकरीबन 10 फीसदी की कमी आनी तो तय हैं। 10फीसदी तक कमी आने से फसलों पर काफी बुरा असर पड़ने वाला है जो की चिंताजनक है।
25 फीसदी कम हुई बारिश
अभी तक ईस्ट और नार्थईस्ट इलाकों में सबसे कम बारिश देखने को मिली है। इन इलाकों में सामान्य से 25 फीसदी कम बारिश हुई है। वहीं फसलों की बुआई के लिहाज से अहम माने जाने वाले नार्थवेस्ट और सेंट्रल इंडिया में जुलाई के मध्य में अच्छी बारिश हुई, लेकिन पिछले दो हफ्तों से इन इलाकों में कमजोर बारिश देखने को मिल रही है, जिसके चलते बारिश के कुल आंकड़ों में कमी देखी जा रही है।