जीएसटी से एक बार फिर सरकार की झोली भरी है। जुलार्इ माह में जीएसटी से सरकार को कुल 96,483 करोड़ रुपये की कमार्इ हुर्इ है।
नर्इ दिल्ली। जीएसटी से एक बार फिर सरकार की झोली भरी है। जुलार्इ माह में जीएसटी से सरकार को कुल 96,483 करोड़ रुपये की कमार्इ हुर्इ है। इसके पहले जून माह में जीएसटी से सरकारी खजाने में कुल 95,610 करोड़ रुपये आए थे। यही जीएसटी से हाेने वाली कमार्इ की बात करें तो जुलार्इ माह में जीएसटी से हुर्इ कुल आैसत कमार्इ से भी अधिक है। पिछले वित्त वर्ष में के हिसाब से देखें तो जीएसटी की प्रति माह आैसत कमार्इ 89,885 करोड़ रुपये है। वस्तु एवं सेवा कर के एक साल पूरा होने पर वित्त सचित हसंमुख अधिया ने कहा था कि जीएसटी से एक लाख करोड़ रुपये का राजस्व जुटाना कोर्इ तय नियम तो नहीं हैं लेकिन सरकार को उम्मीद है कि वो एक लाख प्रति माह का राजस्व जुटा लेगी।
लिए थे अहम फैसले
जीएसटी काउंसिल ने अपने पिछली बैठक में कर्इ अहम फैसले लिए हैं। जिसमें ट्रेडर्स को अासानी से रिटर्न जमा करने जैसे फैसले शामिल थे। उन कारोबार को तिमाही आधार पर रिटर्न भरना होगा जिनका कारोबार 5 करोड़ रुपये से उपर का टर्नआेवर देता है। हालांकि उन्हें अभी भी मासिक आधार पर ही टैक्स भरना होगा। जीएसटी काउंसिल के इस फैसले को इंडिया इंक ने भी स्वागत किया है। इंडिया इंक ने कहा है कि काउंसिल के इस फैसले के बाद कर अनुपालन बढ़ेगा। काउंसिल ने इसके साथ ही कर्इ आैर वस्तुआें पर लगने वाले टैक्स काे कम किया है।
एक साल में कारोबारियों ने चोरी किए 3026 करोड़ रुपये की चोरी
जीएसटी लागू होने के एक साल के अंदर एक तरफ जहां सरकार का खजाना झमाझम भरा है वहीं दूसरी तरफ टैक्स चोरी भी जमकर हुर्इ है। मंगलवार को एक लिखित जवाब में शिव प्रताप शुक्ला ने जानकारी दी की बीते एक साल में करीब 3,026 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी हुर्इ है। शुक्ला ने जानकारी दी की पिछले एक साल में इनपुट टैक्स क्रेडिट आैर नाॅन पेमेंट टैक्स के नाम कारोबारियों ने सरकार को 3,026 करोड़ रुपये का चुना लगाया है। शुक्ला ने बताया कि जुलार्इ 2017 से लेकर जून 2018 के बीच कुल 1,205 केस एेसे हैं जिसमें 3,026.55 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी हुर्इ है।