अब केंद्र सरकार के कर्मचारियों को ओवरटाइम भत्ता नहीं मिलेगा, कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आदेश के मुताबिक ऑपरेशनल स्टाफ को छोड़कर अब किसी कर्मचारी को ओवरटाइम भत्ता नहीं दिया जाएगा।
नर्इ दिल्ली। 2019 के आत चुनावों से पहले केंद्र सरकार ने बड़ा बोल्ड कदम उठाते हुए सरकारी कमर्चारियों आैर अधिकारियों के आेवरटाइम भत्ते को खत्म कर दिया है। सरकार की आेर से उठाया गया ये कदम आने वाले विधानसभा चुनावों आैर आम चुनावों में भाजपा के लिए बड़ा घातक साबित हो सकता है। सरकार की आेर से यह कदम सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद उठाया गया है। नए आदेश के अनुसार अगर किसी को आेवरटाइम अलाउंस चाहिए तो इसके लिए उसे अपने सीनियर से आदेश कराना होगा।
इनको नहीं मिलेगा आेवरटाइम अलाउंस
अब केंद्र सरकार के कर्मचारियों को ओवरटाइम भत्ता नहीं मिलेगा। कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आदेश के मुताबिक ऑपरेशनल स्टाफ को छोड़कर अब किसी कर्मचारी को ओवरटाइम भत्ता नहीं दिया जाएगा। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद यह कदम उठाया गया है। सरकार की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि सातवें वेतन आयोग में वेतन बढ़ाने के बाद ओवरटाइम अलाउंस को खत्म किया जा रहा है। हालांकि सरकार की तरफ से यह भी कहा गया है कि ऑपरेशनल स्टाफ और औद्योगिक कर्मचारियों को इससे अलग रखा जाएगा। इस आदेश को केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों में लागू किया जाएगा। ऑपरेशनल स्टाफ में वे कर्मचारी आते हैं जो कार्यालयों के ठीक से काम करने और व्यवस्था को बनाए रखने का काम करते हैं। यानी मकैनिकल और इलेक्ट्रिकल उपकरणों की मरम्मत और देखभाल करने वाले कर्मचारी इस श्रेणी में आते हैं।
अब एेसे मिलेगा आेवरटाइम अलाउंस
मंत्रालयों और विभागों के प्रशासन ने ऑपरेशनल स्टाफ की लिस्ट बनाने का आदेश जारी किया है। यह फैसला भी लिया गया है कि ओवरटाइम भत्ता बायोमीट्रिक अटेंडेंस के आधार पर दिया जाएगा। सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि ऑपरेशनल स्टाफ का ओवरटाइम भत्ता बढ़ाया नहीं जाएगा। यह 1991 में जारी आदेश के मुताबिक ही दिया जाएगा। कार्मिक मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा है, 'ओवरटाइम भत्ता तभी दिया जाएगा जब कर्मचारी का सीनियर अफसर लिखित में देगा कि जरूरी काम करने के लिए कर्मचारी को कार्यालय में रुकना है।'
भाजपा को यह आदेश पड़ सकता है भारी
इस आदेश के बाद जानकारों की मानें तो भाजपा की केंद्र की सरकार को आने वाले चुनावों में काफी भारी पड़ सकता है। क्योंकि देश में करोड़ों की संख्या में सरकारी कर्मचारी आैर उनके परिवार के सदस्य हैं। जो वोट करते हैं। इस फैसले का असर उनके परिवार पर भी पड़ेगा। एेसे में अोवरटाइम करने की सूरत में उन्हें उसका मेहनताना नहीं मिलेगा तो इस बात की नाराजगी सत्ताधारी पार्टी को झेलनी पड़ेगी।