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तकनीक से भारत के 69 फीसदी नौकरियों पर खतरा – विश्व बैंक

आॅटोमेशन तकनीक के आने से भारत में करीब 69 फीसदी नौकरियों को खतरा हैं। जबकि दुनिया की सबसे अधिक आबाादी वाला देश आैर भारत के पड़ोसी चीन की बात करें तो यहां ये आंकड़ा 77 फीसदी है- विश्व बैंक

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Jim KIm

तकनीक से भारत के 69 फीसदी नौकरियों पर खतरा - विश्व बैंक

नर्इ दिल्ली। आज के आधुनिक दौर में लगभग दुनिया के सभी सेक्टर की कंपनियां आॅटोमेशन तकनीक की तरफ तेजी से बढ़ रहीं हैं। लेकिन आॅटोमेशन तकनीक के आने से कंपनियों को एक तरफ कार्यकुशलता का लाभ तो मिल रहा है लेकिन दूसरी तरफ नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। विश्व बैंक की एक रिसर्च के मुताबिक, आॅटोमेशन तकनीक के आने से भारत में करीब 69 फीसदी नौकरियों को खतरा हैं। जबकि दुनिया की सबसे अधिक आबाादी वाला देश आैर भारत के पड़ोसी चीन की बात करें तो यहां ये आंकड़ा 77 फीसदी है। इन आंकड़ों को जारी करते हुए विश्व बैंक ने अपने रिपोर्ट में कहा कि तकनीक मौलिक रूप से विकासशील देशों की अार्थिक प्रगति को बाधित कर सकता है।


भविष्य की अर्थव्यवस्था के हिसाब से विकसित करना होगा इन्फ्रास्ट्रक्चर

रिपोर्ट जारी होने के बाद विश्व बैंक के अध्यक्ष जिम किम ने कहा, "जैसे-जैसे हम ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रहे हैं, वैसे ही हमें भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए भी इन्फ्रास्ट्रक्चर के बारे में सोचना होगा। हम जानते हैं कि पहले भी आैर निकट भविष्य में भी तकनीक मौलिक रूप से दुनिया को एक नया अाकार देगा।" किम ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा 'लेकिन अर्थव्यवस्था का पारंपरिक रास्ता जो कि कृषि से लेकर बिजली उत्पादन को बढ़ाना है आैर फिर बड़े स्तर पर आैद्योगिकरण करना है , ये विकसित देशों के लिए संभव नहीं होगा।'


कहीं तकनीक छीन ने ले नौकरियों के अवसर

अफ्रिका के एक बड़े हिस्से को देखें तो तकनीक इस पैटर्न को मौलिक रूप से बाधित कर सकता है। विश्व बैंक डाटा के आधार पर किए गए रिसर्च में अुनमान लगया गया है कि आॅटोमेशन से भारत में नौकरियों पर आने वाले खतरे का अनुपात 69 फीसदी है। चीन में ये अांकड़ा 77 फीसदी है। एक आैर विकासशील देश इथियोपिया की बात करें तो रिपोर्ट के मुताबिक यहां आॅटोमेशन से करीब 85 फीसदी नौकरियों को खतरा है। किम ने आगे कहा कि यदि ये वाकर्इ में सच है आैर यदि इन देशों में नौकरियों को इतने बड़े स्तर पर खतरा है तो हमें इस बात कर जरूर समझना चाहिए कि इन देशों में अर्थव्यवस्था की रफ्तार के लिए कौन से रास्ते माैजूद हैं आैर इसी हिसाब से इन्फ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने की तैयारी करनी होगी।