प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य 11.70 लाख करोड़ रुपए रखा गया है अभी भी 4 लाख करोड़ रुपए कम है प्रत्यक्ष कर संग्रह दो फरवरी और मार्च का टैक्स कलेक्शन का डाटा अप्रैल में आएगा
नई दिल्ली। मौजूदा समय में केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ा संकट रेवेन्यू का है। कमाई पूरी तरह से खत्म हो गई है। राजकोषीय घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। यहां तक कि जनता से जुड़े काम भी खत्म हो गए हैं। सरकार को अपने रुटीन काम करने में होने वाले खर्च के लिए आरबीआई के सामने हाथ फैलाने पड़ रहे हैं। ऐसे में सरकार के सामने एक रास्ता नजर आता है वो है टैक्स कलेक्शन। सरकार इस टैक्स कलेक्शन पर ज्यादा ध्यान दे रही है। ताकि रोजमर्रा के के कामों के लिए रुपया आता रहे। सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के जनवरी तक का आंकड़ा राज्यसभा में पेश किया है।
डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन की दी जानकारी
सरकार ने राज्यसभा में मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि मौजूदा वित्तवर्ष में 31 जनवरी तक प्रत्यक्ष कर संग्रह कुल 7.52 लाख करोड़ रुपए का हुआ है। संशोधित अनुमान के मुताबिक, मौजूदा वित्तवर्ष के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य 11.70 लाख करोड़ रुपए है। वित्तवर्ष 31 मार्च को समाप्त होगा।
इतना हुआ कलेक्शन
केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में कहा, "प्रत्यक्ष कर संग्रह के तहत 31 जनवरी, 2020 तक संग्रहित कुल धनराशि 7,52,472 करोड़ रुपए है।" उन्होंने कहा कि अंतिम अग्रिम कर किश्त मार्च 2020 में आएगी, और इसलिए फिलहाल मौजूदा वित्तवर्ष के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह का अंतिम आंकड़ा देना जल्दबाजी होगी। ठाकुर ने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष के लिए संशोधित अनुमान में 18.50 लाख करोड़ रुपए राजस्व की बात कही गई है, जो बजट में प्रस्तावित 19.62 लाख करोड़ रुपए से कम है।
रिवाइज्ड टारगेट पूरा कर पाएगी सरकार
खास बात ये है सरकार के पास दो महीने यानी मार्च तक का समय है। फरवरी का आंकड़ा सामने नहीं रखा गया है। अप्रैल में मार्च का आंकड़ा सामने आएगा। तब पता चलेगा कि सरकार की ओर रखे रेवेन्यू टारगेट पूरा हो पाएगा या नहीं। वास्तव में सरकार ने बजट के टारगेट को भी रिवाइज्ड किया है। करीब 1 लाख करोड़ रुपए की कटौती है। जानकारों की मानें तो सरकार पूरी कोशिश कर रही है। लेकिन जिस तरह की देश और आम लोगों की वित्तीय स्थिति है, उसे देखते हुए सरकार के लिए यह टारगेट अचीव करना टेढ़ी खीर होगा।