संगठन के एशिया एंड पैसिफिक डिपार्टमेंट के डायरेक्टर चंगयोंग राई ने दिया बयान आईएमएफ ने कहा कि भारत ने लिया है बड़ा बुद्घिमानी भरा फैसला आईएमएफ की ओर से भारत की अनुमानित इकोनॉमी ग्रोथ 1.9 फीसदी की
नई दिल्ली।कोरोना वायरस को रोकने के लिए भारत की ओर से लॉकडाउन बढ़ाने की तारीफ पूरी दुनिया में हो रही है। अब इसपर आईएमएफ की ओर भारत के कदम को सलाम किया है। आईएमएफ ने कहा है कि आर्थिक चोटों को झलने के बाद भी भारत ने लॉकडाउन बढ़ाने का फैसला लिया है, जो कि एक बड़ा कदम है। वहीं उन्होंने भारत को बुद्घिमान बताते हुए कहा कि भारत में कोरोना वायरस की एंट्री उस वक्त हुई जब पूरी दुनिया महामंदी में आ चुकी है। संगठन के एशिया एंड पैसिफिक डिपार्टमेंट के डायरेक्टर चंगयोंग राई ने कहा कि स्लोडाउन के बीच भारत में महामारी का प्रसार हुआ और ऐसे में इसके रिकवरी की संभावना अधिक अनिश्चित हो जाती है।
लांग टर्म के लिए भारत का फैसला सही
राई ने कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ भारत की सख्त कार्रवाई आर्थिक गतिविधि में गिरावट का कारण बन सकती है, विकास दर निश्चित रूप से नीचे जाएगी, लेकिन मुझे लगता है कि इस बीमारी के फैलने की लांग टर्म में भारत को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए लिया गया यह एक बुद्धिमान भरा और महत्वपूर्ण निर्णय है।
उन्होंने कहा कि राजकोषीय प्रोत्साहन और साथ ही भारत सरकार और रिजर्व बैंक द्वारा अपनाई गई मॉनेटरी पॉलिसी सही दिशा में है, लेकिन क्या वे पर्याप्त होंगे यह इस बात पर निर्भर करता है कि कन्टेंटमेंट पॉलिसी कैसे अपनाई जाती है और यह कितनी सफल होगी। उन्होंने कहा कि स्थिति गंभीर होती है, तो मुझे लगता है कि छोटी अवधि में उनके पास अर्थव्यवस्था में मंदी को रोकने के लिए अधिक राजकोषीय और मॉनेटरी पॉलिसी का उपयोग करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
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1.9 फीसदी रह सकती है भारत की इकोनॉमी
आईएमएफ ने अनुमान जाहिर किया है कि भारत इस साल कोरोना वायरस के कारण मंदी के बीच फंसी दुनिया में सबसे तेज वृद्धि करने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बनेगा। आईएमएफ ने हालांकि भारत की विकास दर घटाकर 1.9 फीसदी कर दिया है। आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ द्वारा मंगलवार को जारी विश्व आर्थिक परिदृश्य (डब्ल्यूईओ) रिपोर्ट में उम्मीद जाहिर की गई है कि भारत अगले वित्त वर्ष में 7.4 फीसदी वृद्धि दर के साथ वापसी करेगा, जो जनवरी अपडेट में अनुमानित दर से अधिक है। डब्ल्यूईओ ने दुनिया की एक धुंधली तस्वीर पेश की है और कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस साल तीन प्रतिशत तक सिकुड़ जाएगी।