मनमोहन सिंह ने कहा कि अगर 2022 तक हमें किसानों की आय को दोगुना करना है तो कृषि में 14 फीसदी की विकास दर होनी चाहिए जिसकी फिलहाल कोई संभावना नहीं दिख रही है।
नर्इ दिल्ली। जब से देश में बीजेपी की सरकार आर्इ है तब से लेकर आज तक देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी किसानों को संबोधित करते हैं तो पूर्व सरकारों को किसानों की बद्तर हालत का जिम्मेदार बताते रहे। 2017 में यूपी में सरकार बनी तो गन्ना किसानों को पूरा बकाया आैर किसानों के कर्ज के माफ करने की बात की गर्इ। इस साल बजट आया तो वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दाेगुना करने की बात की गर्इ। शनिवार को शाहजहां पुर में एक बार फिर से नरेंद्र मोदी ने किसानों को संबोधित किया। जिसका जवाब आज देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दिया है। आइए आपको भी बताते हैं कि मनमोहन सिंह की आेर से किस तरह का जवाब दिया गया है…
चाहिए 14 फीसदी की विकास दर
कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री आैर इकोनोमिस्ट मनमोहन सिंह ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए किसानों की आय दोगुना करने के वादे पर कहा कि कृषि में 14 फीसदी की विकास दर हासिल किए बिना यह संभव नहीं है। मनमोहन सिंह ने कहा कि अगर 2022 तक हमें किसानों की आय को दोगुना करना है तो कृषि में 14 फीसदी की विकास दर होनी चाहिए जिसकी फिलहाल कोई संभावना नहीं दिख रही है। आपको बता दें कि इस साल वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2018 के लिए पेश किए गए आर्थिक सर्वे में कृषि क्षेत्र में 2.1 फीसदी विकास दर का अनुमान जताया था।
मनमोहन सिंह की बात मानें तो
अगर पूर्व अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह की बात मानें तो 2022 तक देश में किसानों की आय दोगुना नामुमकिन है। क्योंकि अगले तीन सालों में कृषि विकास अरुण जेटली के अनुमान से काफी आगे भी निकल जाए तो भी 14 फीसदी तक पहुंच पाना मुश्किल होगा। अब सवाल ये है कि मौजूदा सरकार किसानों के सामने इस तरह का प्रचार करनेे क्याें जुटी हुर्इ है? सवाल ये है कि क्या किसान इस बात को मान रहे हैं कि 2022 तक उनकी आय में इजाफा हो जाएगा? आपको बता दें कि पूरे देश में किसानों के मन में भाजपा के लिए काफी रोष पैदा हो रहा है।
एमएसपी बढ़ाने का किया था फैसला
वहीं मोदी सरकार की आेर से पिछले दिनों में खरीफ की 14 फसलों पर न्यूनतम समर्थन बढ़ा दिया था। जिसके बाद सरकार को लगा था कि इससे किसानों को राहत मिलेगी आैर उनका रोष थोड़ा कम होगा। वहीं गन्ना किसानों को राहत देने के लिए 8 हजार करोड़ रुपए का पैकेज आैर एफआरपी भी बढ़ाया था। लेकिन जानकारों ने कहा था किसानों को दिया गया पैकेज आैर एफआरपी काफी नाकाफी है।