अर्थव्‍यवस्‍था

बजट में साफ पानी, मेडिकल कॉलेज और सरोकार, लेकिन कहां है रोजगार

आईएएनएस/सी वोटर द्वारा बजट बाद किए गए सर्वेक्षण में मिले संकेत बेरोजगारी दूर करने के लिए बजट में किए गए प्रयासों से संतुष्ट नहीं जनता 10.7 फीसदी प्रतिशत भारतीय सोचते हैं कि ये प्रयास रोजगार को बढ़ावा देंगे

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People believed that budget will not increase employment

नई दिल्ली। सरकार बजट 2020 को लेकर अपनी पीठ भले ही थपथपा रही है, लेकिन लोगों का मामना है कि इस बजट से रोजगार पैदा नहीं होगा, लेकिन लोगों ने सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं जैसे स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा कॉलेज और देश से टीबी उन्मूलन की सराहना की है। आईएएनएस/सी वोटर द्वारा बजट बाद किए गए सर्वेक्षण में संकेत मिला है कि लोग बेरोजगारी दूर करने के लिए बजट में किए गए प्रयासों से संतुष्ट नहीं हैं। बेरोजगारी इस समय 45 साल के सबसे ऊपर है। सर्वेक्षण के अनुसार मात्र 10.7 फीसदी भारतीय सोचते हैं कि ये प्रयास रोजगार को बढ़ावा देंगे, जो कि सरकार के लिए मुसीबत बनी हुई है।

हेल्थ और पानी के लिए संतुष्ट जनता
वित्तमंत्री ने टीबी उन्मूलन के लिए 2025 की समय सीमा तय कर दी है, जिसकी लोगों ने सराहना की है। कुल 79.9 फीसदी लोग महसूस करते हैं कि यह कारगर होगा और बीमारी पर लगाम लग जाएगा। टीबी के कारण देश में प्रति वर्ष 15 लाख से अधिक मौतें हो जाती हैं और भारत में टीबी के मरीजों की संख्या दुनिया का 28 फीसदी है। स्वच्छ पेयजल प्रदान करने वाली प्रधानमंत्री जल जीवन योजना की भी लोगों ने सराहना की है। कुल 76.5 फीसदी लोगों ने इस योजना को सराहा है, जिसके लिए बजट में 3.6 लाख करोड़ रुपए दिए गए हैं।

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मेडिकल कॉलेज को लेकर घोषणाओं से संतुष्ट
हरेक जिले में अस्पतालों के साथ मेडिकल कॉलेज स्थापित करना भी एक बड़ी घोषणा है, जिसे 75.1 फीसदी लोग सरकार द्वारा लिया गया एक अच्छा निर्णय मानते हैं। इस सर्वेक्षण में आम बजट के बारे में लोगों की राय जानी गई है, जिसमें बजट के विभिन्न बिंदुओं पर कई सारे प्रश्न शामिल किए गए थे। यह सर्वेक्षण वित्तमंत्री निर्मला सीतारणम द्वारा लोकसभा में बजट पेश किए जाने के तत्काल बाद शनिवार को किया गया, जिसमें देश के सभी क्षेत्रों से 1200 लोगों को शामिल किया गया था।

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