ड्यूश बैंक ने अपने एक रिपोर्ट में दावा किया कि RBI अपने अगली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में 0.25 फीसदी तक बढ़ा सकता है।
नर्इ दिल्ली।भारतीय रिजर्व बैंक अपने अगली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में 0.25 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर सकता है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म ड्यूश बैंक ने अपने एक रिपोर्ट में इस बात का दावा किया है। ड्यूश बैंक ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को ध्यान में रखते हुए अपने रिपोर्ट में ये दावा किया है। इससे पहले भी इस फर्म ने कहा था कि, रिजर्व बैंक ब्याज दरों के मोर्चे पर यथास्थिति बनाए रखेगा आैर वित्त वर्ष 2017-18 के अंतिम तिमाही या नए वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इसमें वृद्धि कर सकता हैं।
वैश्विक बढ़ोतरी का ध्यान में रखते हुए रिजर्व बैंक बढ़ा सकता है ब्याज दर
ड्यूश बैंक ने अपने रिपोर्ट में दावा किया है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वैश्विक बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए रिजर्व बैंक नीतिगत ब्याज दरों को बढ़ा सकता हैं। रिपोर्ट में आगे ये भी कहा गया है कि, "हमें अब लगता है कि रिजर्व बैंक जून में ही रेपो रेट में 0.25 फीसदी की वृद्धि कर सकता है आैर यह बढ़कर 6.25 फीसदी तक पहुंच सकता है। इससे पिछले साल अगस्त में हुर्इ 0.25 फीसदी की कटौती समाप्त हो जाएगी आैर इसके बाद एक आैर 0.25 फीसदी की वृद्धि इस कैलेंडर वर्ष के अंत में या फिर अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में की जा सकती हैं।"
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रुडा आॅयल की कीमत इन दिनों 75 डाॅलर प्रति बैरल के करीब हैं। दिसंबर 2017 के मुकाबले इसमें 12 फीसदी का इजाफा हुआ हैं। ब्रेंट क्रुड आॅयल ही भारत में आयात किया जाता हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से देखें तो कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से काफी नाकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इससे मुद्रास्फीति, चालू खाता, वित्तीय घाटा आैर रुपए के विनिमय दर पर असर पड़ेगा। एेसे में रिजर्व बैंक इस असर को कम करने या पूरी तरह से खत्म करने के लिए पहले से ही जरूरी कदम उठा सकता हैं।